सऊदी-पाक रक्षा समझौता: भारत के लिए ऑपरेशन सिंदूर 2.0 पर क्या असर पड़ेगा?
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार को एक साझा रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कहा गया है कि किसी भी देश के खिलाफ हमला दोनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा। इस करार को ‘स्ट्रैटीजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ कहा गया है। रियाद दौरे पर गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इसे दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम बताया।
यह समझौता भारत के लिए अहम मायने रखता है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अपने सुरक्षा प्रयासों को बढ़ा दिया है। भारत ने कई बार स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और आतंकियों की गतिविधियों पर दोबारा कार्रवाई की जाएगी। सवाल यह उठता है कि अगर भारत पाकिस्तान के भीतर कार्रवाई करता है, तो क्या सऊदी अरब पाकिस्तान का समर्थन करेगा या तटस्थ रहेगा।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ऑपरेशन सिंदूर के बाद वैश्विक कूटनीतिक दौरे पर हैं। उन्होंने सऊदी अरब, यूके और अमेरिका में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर वार्ता की। जून में अमेरिका का दौरा, जुलाई में चीन और अगस्त में फिर अमेरिका का दौरा पाकिस्तान की चिंता और रणनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान-सऊदी समझौता मध्य-पूर्व के हालातों से अधिक जुड़ा है। लेफ्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद ने कहा कि भारत को चौकन्ना रहना चाहिए, लेकिन ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। कर्नल राकेश शर्मा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को आर्थिक और सैन्य दृष्टि से कमजोर किया है, इसलिए भारत-पाक संघर्ष की स्थिति में सऊदी अरब की मदद सीमित रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान सऊदी अरब से आर्थिक मदद प्राप्त कर सकता है, लेकिन कश्मीर में बड़ा सैन्य हमला करना मुश्किल होगा क्योंकि सऊदी के निवेश से जुड़े हित भी हैं।
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस समझौते को गंभीर घटना बताया और कहा कि यह भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने बताया कि कमजोर पाकिस्तान अब सऊदी अरब की मदद से अपनी सेना को मजबूत कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब के लिए भारत की किसी कार्रवाई पर पाकिस्तान का समर्थन करना आसान नहीं होगा। हालांकि, भविष्य में पाकिस्तान आर्थिक और सैन्य मदद हासिल कर सकता है। भारत को इस समझौते के बाद अपनी रणनीतिक और सैन्य तैयारियों पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि किसी अप्रत्याशित स्थिति में देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
करीब 11 साल पहले मोदी सरकार ने इस्लामिक देशों में पाकिस्तान की पैठ घटाने की मुहिम शुरू की थी, और उसे व्यापक सफलता भी मिली। पीएम मोदी को प्रमुख इस्लामिक देशों का सर्वोच्च सम्मान मिला। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाने और आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान को इन देशों का समर्थन नहीं मिला। लेकिन सऊदी-पाक समझौते के बाद भारत को भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए सतर्क रहना होगा।