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मणिमहेश यात्रा प्रभावित: चंबा-भरमौर हाईवे टूटा-फूटा, दुकानें और लंगर स्थल मलबे में दबी

चंबा/20/09/2025

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हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में हड़सर से डल झील तक का मार्ग प्राकृतिक आपदा के बाद तबाही का मंजर पेश कर रहा है। जहां कभी अस्थायी दुकानें और लंगर स्टॉल चलते थे, वहां अब सिर्फ चट्टानें और ढही मिट्टी बिखरी पड़ी हैं। भूस्खलन और उफनते नालों के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं और कई स्थानों पर मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। टूटी-फूटी कारें मलबे में आधी दबी हुई हैं और भरमौर कस्बे तक वाहन किसी तरह पहुंच पा रहे हैं, लेकिन उसके आगे का रास्ता बेहद खतरनाक है।

भूस्खलन और मलबे के कारण चंबा-भरमौर नेशनल हाईवे कई स्थानों पर बाधित है। भरमौर-होली उपमंडल की 31 पंचायतों में 70 हजार लोग और फंसे सेब को मंडियों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। प्रबंधन ने अस्थायी मार्ग खोला है, लेकिन गिरते पत्थर और फिसलन यात्रा को खतरनाक बनाए हुए हैं। श्रद्धालुओं और लंगर समितियों का सामान भी डल झील मार्ग में बिखरा पड़ा है। गौरीकुंड और सुंदरासी में टेंट और ढांचे ढहकर मलबे में बदल गए हैं।

हाईवे के कई हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। कटोरी बंगला से भरमौर तक करीब 13 किलोमीटर हाईवे क्षतिग्रस्त हुआ। परेल में छह किलोमीटर, जांघी और कलसूई में 50-50 मीटर, लोथल में 700 मीटर और दुर्गेठी घार में दो जगह 250-250 मीटर हाईवे धंस गया। बकाणी, बग्गा, रूंगडी नाला और चूड़ी में भी सड़क को नए सिरे से पहाड़ काट, पत्थर भर और अस्थायी डंगे लगाकर सुचारु किया गया।

पर्यावरणविद कुलभूषण उपमन्यु ने इसे ग्लोबल वार्मिंग का असर बताया और कहा कि हिमालय में तापमान सामान्य से बढ़ा है, जिससे बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि धार्मिक यात्रा को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं बदलना चाहिए, हर क्षेत्र की सहन क्षमता होती है और प्रकृति से खिलवाड़ के नतीजे भुगतने पड़ते हैं।

लोक निर्माण विभाग बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता जीत सिंह ठाकुर ने बताया कि कई जगह पहाड़ काटकर हाईवे अस्थायी रूप से सुचारु किया गया है। पूरी तरह सड़क को बहाल करने के लिए करोड़ों रुपये की आवश्यकता है। अब तक 245 करोड़ रुपये का नुकसान सामने आया है और हाईवे के रख-रखाव के लिए अतिरिक्त 35 करोड़ रुपये की जरूरत है।

प्राकृतिक आपदा ने मणिमहेश यात्रा और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। प्रशासन और विभागों की चुनौती बढ़ गई है और प्रभावित मार्गों को पूरी तरह बहाल करने के लिए समय और भारी बजट की आवश्यकता है।

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