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आंसर शीट की दूसरी बार री-वेल्यूएशन की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- खुल जाएगा भानुमती का पिटारा

शिमला/21/09/2025

high cour shimla

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 10+2 परीक्षा की आंसर शीट का दूसरी बार पुनर्मूल्यांकन (री-वेल्यूएशन) कराने की मांग को सख्ती से खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि छात्रों को दूसरी बार री-वेल्यूएशन की अनुमति दी गई तो आने वाले समय में "भानुमती का पिटारा" खुल जाएगा और हजारों छात्र अदालत का दरवाजा खटखटाने लगेंगे। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह की अनुमति न केवल हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के नियमों के खिलाफ होगी बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भी अवमानना होगी।

दरअसल, याचिकाकर्ता इसी साल 10+2 परीक्षा में शामिल हुई थी। परीक्षा परिणाम 17 मई को घोषित हुआ था, जिसमें अंग्रेजी विषय में उसे 73 अंक मिले। इसके बाद आरोप लगे कि कई उत्तरों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ है। बोर्ड ने खुद जांच की और पुनरीक्षण (Re-checking) प्रक्रिया में उसके अंक बढ़कर 86 हो गए। इसके बाद छात्रा ने बोर्ड के नियमों के तहत री-वेल्यूएशन (Re-evaluation) के लिए आवेदन किया। 23 अगस्त को आए परिणाम में अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान दोनों विषयों में एक-एक अंक की वृद्धि की गई।

इसके बाद भी छात्रा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि उसे उम्मीद है कि उसके अंक और अधिक हो सकते हैं, इसलिए अदालत दोबारा री-वेल्यूएशन कराने का आदेश दे। बोर्ड ने इस पर तर्क दिया कि नियमों में दूसरी बार पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है।

हाईकोर्ट ने बोर्ड की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि एक बार पुनर्मूल्यांकन का अधिकार प्रयोग करने के बाद छात्रा को दोबारा यह सुविधा नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका है कि जहां नियमों में दूसरी बार री-वेल्यूएशन का प्रावधान नहीं है, वहां हाईकोर्ट भी ऐसा आदेश जारी नहीं कर सकता। इसी आधार पर अदालत ने याचिका को खारिज कर मामले का निपटारा कर दिया।

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