किन्नौर के लिप्पा गांव में बनी खतरनाक झील पर हाईकोर्ट सख्त, एचपीपीसीएल से मांगा जवाब
शिमला/21/09/2025
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले का लिप्पा गांव इन दिनों बड़े खतरे के साये में जी रहा है। 4 सितंबर को हुई भारी बारिश के बाद गांव में एक खतरनाक झील बन गई है, जिसे ग्रामीण अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह झील प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) की लापरवाही से बनी है। उनका कहना है कि एचपीपीसीएल ने अपने प्रोजेक्ट का मलबा और गाद सीधे दो बरसाती नालों में डाल दिया, जिससे उनका बहाव पूरी तरह रुक गया। जब 4 सितंबर को भारी बारिश हुई, तो पानी को निकलने का रास्ता नहीं मिला और वह जमा होकर एक विशाल झील में तब्दील हो गया। अब यह झील पूरे गांव के लिए ‘टाइम बम’ की तरह खतरा बन चुकी है।
गांववालों की इस गंभीर चिंता को लेकर उन्होंने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को एक पत्र लिखा। इस पर मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया और एचपीपीसीएल समेत सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए किन्नौर के उपायुक्त (DC) को तुरंत मौके पर जाकर जरूरी कदम उठाने का सख्त निर्देश दिया है, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके।
हाईकोर्ट ने साफ किया है कि लोगों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। अदालत ने सभी संबंधित विभागों को 16 अक्तूबर तक अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। इस रिपोर्ट में उन्हें बताना होगा कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है और इस खतरनाक झील के पानी की सुरक्षित निकासी के लिए क्या ठोस योजना बनाई गई है। फिलहाल लिप्पा गांव के लोग दहशत और चिंता में जी रहे हैं और अब उनकी उम्मीदें प्रशासन और एचपीपीसीएल की कार्रवाई पर टिकी हैं। अदालत की सख्ती ने ग्रामीणों को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब इस झील से खतरे को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।