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साउथ कोरिया में 6 साल में 7,000 से ज्यादा साइबर हमले, छोटी कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित

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साउथ कोरिया में साइबर सुरक्षा को लेकर खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते छह सालों में यहां कुल 7,198 साइबर हमले और डेटा ब्रीच के मामले दर्ज किए गए हैं। 2020 में 603 मामले सामने आए थे, जो 2024 तक बढ़कर 1,887 तक पहुंच गए। इस साल अब तक 1,649 मामले सामने आ चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि साइबर खतरा लगातार गहराता जा रहा है।

साइबर हमलों का सबसे बड़ा शिकार छोटी और मंझोली कंपनियां रही हैं। कुल मामलों में से लगभग 82 प्रतिशत यानी 5,907 केस इन्हीं कंपनियों से जुड़े हैं। इसके बाद मिड-साइज कंपनियों के 592 और बड़ी कंपनियों के 242 मामले दर्ज हुए। गैर-लाभकारी संगठनों पर भी 457 साइबर हमले हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हमलों का प्रकार मुख्य रूप से सिस्टम हैकिंग था। कुल मामलों में से 60 प्रतिशत यानी 4,354 केस सिस्टम हैकिंग के थे। इसके अलावा मॉलवेयर संक्रमण और फैलाव 20.9 प्रतिशत और DDoS (Distributed Denial of Service) अटैक 18.6 प्रतिशत मामलों में दर्ज हुए। 2020 में सिस्टम हैकिंग के मामले 41 प्रतिशत थे, जो 2024 में बढ़कर 72 प्रतिशत तक पहुंच गए।

हाल ही में साउथ कोरिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल पेमेंट कंपनी KT Corp के पेमेंट सिस्टम में ब्रीच सामने आया। शुरू में कंपनी ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र केवल साउथवेस्ट सियोल और ग्योंगगी प्रांत के कुछ हिस्सों तक सीमित हैं, लेकिन बाद में पता चला कि इसका असर साउथ सियोल और गॉयांग इलाकों में भी हुआ। पहले 278 लोग प्रभावित बताए गए थे, अब यह संख्या बढ़कर 362 हो गई है।

इस घटना पर सांसद ह्वांग जंग-आ ने नाराज़गी जताई और कहा कि अगर कंपनी समय पर पूरी जानकारी साझा करती तो जांच आसान होती। उन्होंने कहा कि कंपनियों की धीमी और असंगठित रिपोर्टिंग से समस्या और गंभीर हो रही है।

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ती डिजिटल निर्भरता और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम का विस्तार खतरे को और बड़ा बना रहा है। खासकर टेलीकॉम और फाइनेंशियल सेक्टर हैकर्स के मुख्य टारगेट बने हुए हैं। छोटी कंपनियों के पास साइबर सुरक्षा के लिए पर्याप्त बजट और उन्नत टेक्नोलॉजी नहीं होती, इसलिए वे बार-बार निशाने पर आती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब सरकार और कंपनियों दोनों को मिलकर साइबर सुरक्षा में निवेश करना होगा। कंपनियों को तेज रिस्पॉन्स सिस्टम विकसित करना चाहिए ताकि डेटा ब्रीच होने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें। साथ ही छोटी कंपनियों को साइबर ट्रेनिंग और आधुनिक सुरक्षा टूल्स उपलब्ध कराए जाने चाहिए। पारदर्शिता भी जरूरी है ताकि जनता को समय पर सही जानकारी मिल सके।

KT Corp जैसी बड़ी कंपनी पर हालिया हमला यह दिखाता है कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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