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11 साल पुराने नन्ही परी गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट से बरी अख्तर अली, परिजन और जनता में गहरा आक्रोश

पिथौरागढ़/21/09/2025

पिथौरागढ़ जिले की 7 साल की मासूम कशिश के साथ हुए गैंगरेप और हत्या के मामले में मुख्य आरोपी अख्तर अली को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। इस फैसले के बाद पूरे इलाके में गहरा आक्रोश फैल गया है। 11 वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे मासूम के परिवार को यह फैसला एक बड़ा सदमा पहुंचा। जनता और परिजन अब सड़कों पर उतर आए हैं और न्याय की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्थानीय लोग कहते हैं कि "बलात्कारी अख्तर अली को घसीटकर बाहर निकालेंगे और पिथौरागढ़ में उसकी मुंडी फेंक देंगे, क्योंकि उसने हमारी तीन साल की बेटी कशिश के साथ बलात्कार किया है।" लोगों का गुस्सा इतना बढ़ा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को मजाक बताया और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाया है।

पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में आक्रोश की लहर दौड़ गई। नगर की जनता, मातृशक्ति, विद्यालयों के छात्र और आम लोग रामलीला मैदान में एकत्रित हुए। यहां “दोषी कोन, मासूम को न्याय दो” जैसे नारे गूंजे। प्रदेश सरकार की कमजोर पैरवी पर लोगों का रोष साफ दिखाई दिया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या न्याय व्यवस्था में कमजोर तबकों की आवाज सुनी जा रही है।

परिजनों ने प्रेस वार्ता में बताया कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई हुई, लेकिन उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं मिली। उन्होंने प्रदेश सरकार पर कमजोर पैरवी का आरोप लगाया और कहा कि पॉक्सो कोर्ट और हाईकोर्ट में दोष सिद्ध होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट से न्याय नहीं मिला। परिवार ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की जाए और दोषियों को कठोरतम सजा दी जाए, ताकि मासूम की न्यायोचित मौत का बदला मिल सके।

इस मांग के समर्थन में विभिन्न संगठनों ने भी अपना आक्रोश जताया। परिजनों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने की बात कही। पूरे पिथौरागढ़ जिले में जनता के भीतर गुस्सा व्याप्त है। विभिन्न संगठनों और छात्र मोर्चों ने कहा कि मासूम को न्याय मिलने तक वे चैन से नहीं बैठेंगे और सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की। रामलीला ग्राउंड में समाजसेवी संगठन एकत्रित हुए और संकल्प लिया कि मासूम को न्याय दिलाने की हर कोशिश की जाएगी।

इस मामले का इतिहास भी अत्यंत दुखद है। 20 नवंबर 2014 को पिथौरागढ़ की रहने वाली 7 साल की मासूम अपने परिवार के साथ हलमनी के शीशमहल स्थित रामलीला ग्राउंड में शादी समारोह में आई थी। अचानक वह लापता हो गई और छह दिन बाद उसका शव गोला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम में पुष्टि हुई कि बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया और लोगों में भारी गुस्सा भड़का।

पुलिस ने जांच के लिए कई राज्यों में तलाशी अभियान चलाया। घटना के आठ दिन बाद मुख्य आरोपी अख्तर अली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर दो अन्य आरोपी प्रेमपाल और जूनियर मसीह को पकड़ा गया। मार्च 2016 में हल्द्वानी की एडीजे स्पेशल कोर्ट ने अख्तर अली को गैंगरेप और हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई, जबकि प्रेमपाल को पांच साल की सजा मिली। अक्टूबर 2019 में नैनीताल हाईकोर्ट ने अख्तर अली को आजिवन कारावास की सजा सुनाई। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट से आरोपी बरी हो गए, जिससे जनता और परिवार में गहरा आक्रोश है।

आज इस प्रकरण पर बीजेपी का शिष्टमंडल परिजनों से मिलने पिथौरागढ़ उनके आवास पर पहुंचा। इसी दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फोन पर मासूम के पिता से वार्ता की और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पूरी तरह उनके साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि न्याय विभाग और वरिष्ठ वकीलों से विधिक राय लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

समाज को अब एकजुट होकर ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठानी होगी, ताकि कोई और मासूम ऐसी त्रासदी का शिकार न बने।

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