सुप्रीम कोर्ट ने कहा: अब मानहानि को अपराध की श्रेणी से हटाने का सही समय
नई दिल्ली/23/09/2025
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अब समय आ गया है कि मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाए। कोर्ट ने यह टिप्पणी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए की। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच पूर्व जेएनयू प्रोफेसर अमिता सिंह की ओर से 2016 में एक मीडिया संस्थान के खिलाफ दाखिल मानहानि मामले की सुनवाई कर रही थी।
मामले में दावा किया गया कि प्रोफेसर अमिता सिंह ने एक डॉजियर तैयार किया था, जिसमें जेएनयू को अश्लील गतिविधियों और आतंकवाद का अड्डा बताया गया। अमिता सिंह का आरोप है कि रिपोर्टर और संपादक ने बिना सत्यता जांचे यह खबर प्रकाशित की, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश के आदेश पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से सहमति जताई कि राहुल गांधी का मामला भी इसी तरह विचाराधीन है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर अमिता सिंह को नोटिस भेजा। इस मामले का लंबा इतिहास है: 2017 में दिल्ली की मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने मीडिया संस्थान के एडिटर और डिप्टी एडिटर को मानहानि मामले में सम्मन भेजा। 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस सम्मन को रद्द किया, लेकिन 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला पलटते हुए केस को दोबारा मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेजा। मई 2025 में हाई कोर्ट ने फिर से सम्मन को सही ठहराया। इसके खिलाफ मीडिया संस्थान और डिप्टी एडिटर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
भारत उन कुछ लोकतांत्रिक देशों में शामिल है, जहां मानहानि को अब भी आपराधिक अपराध माना जाता है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356 मानहानि के लिए सजा का प्रावधान करती है। पहले यह प्रावधान आईपीसी की धारा 499 में था, जिसकी संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में सही ठहराया। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आपराधिक मानहानि कानून बोलने की आज़ादी पर जरूरी रोक है और यह लोगों के जीवन और सम्मान की रक्षा करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई में यह संकेत दिया कि अब मानहानि कानून में सुधार करने का सही समय आ गया है, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका सुरक्षित रहे।