हिमाचल: मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना के सेवा विस्तार मामले में हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा
शिमला/25/09/2025
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना के सेवा विस्तार मामले में राज्य सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हलफनामे में यह बताया जाए कि क्या मुख्यमंत्री कैबिनेट की मंजूरी के बिना सेवा विस्तार की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज सकते हैं या नहीं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह भी पूछा कि क्या मुख्यमंत्री की ओर से भेजी गई सिफारिश नियमों के विपरीत थी।
राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने अधिक जानकारी और दस्तावेज पेश करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। बहस के दौरान प्रबोध सक्सेना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम 1958 का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की सिफारिश में सार्वजनिक हित और पूर्ण औचित्य होना चाहिए। महाधिवक्ता ने एक विशिष्ट हलफनामा दायर करने के लिए समय मांगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या सिफारिश इन नियमों के दायरे में आती है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि मामले से संबंधित रिकॉर्ड नई दिल्ली से शिमला भेज दिया गया है और दशहरा की छुट्टियों को देखते हुए अदालत ने निर्देश दिए कि रिकॉर्ड रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष पेश किया जाए। वहां इसकी एक फोटोकॉपी सीलबंद लिफाफे में रखी जाएगी, जबकि मूल रिकॉर्ड संबंधित अधिकारी को सीलबंद लिफाफे में सौंप दिया जाएगा।
अदालत ने राज्य सरकार को एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करने को भी कहा, जिसमें 28 मार्च 2025 को केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद पारित आदेश शामिल हों। इन कारणों से मामले की सुनवाई अब 13 अक्तूबर तक स्थगित कर दी गई है।
मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना के सेवा विस्तार को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। उनकी सेवा विस्तार अवधि 30 सितंबर 2025 को समाप्त हो रही है।