हिमाचल पर्यटन संकट: होटल बंद, टैक्सी चालक बेहाल
हिमाचल प्रदेश का पर्यटन कारोबार, जो कभी राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता था, अब लगातार गिरावट का सामना कर रहा है। कोरोना महामारी के बाद भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ और भारी बारिश जैसी आपदाओं ने यहां के पर्यटन उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई है।
शिमला, कुल्लू, मनाली और धर्मशाला जैसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन अब पर्यटकों की पहली पसंद नहीं रह गए हैं। आलोक सूद और राजीव वर्मा जैसे होटल कारोबारी मजबूरी में अपने होटल बेचने पर उतर आए। टैक्सी चालकों और होमस्टे संचालकों की हालत भी दयनीय हो चुकी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पर्यटन क्षेत्र राज्य की जीएसडीपी में 7.78% योगदान देता है और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। लेकिन महामारी और आपदाओं के बाद यह उद्योग औंधे मुंह गिर पड़ा है। 2017 में जहां करीब 196 करोड़ पर्यटक आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 181 लाख पर ही सिमट गई।
2025 के मानसून में भारी बारिश और 4881 करोड़ से अधिक के नुकसान ने स्थिति और बिगाड़ दी। मंडी–मनाली मार्ग, औट–बंजार सड़क और कालका–शिमला रेलवे जैसे प्रमुख मार्ग क्षतिग्रस्त रहे। वोल्वो बस सेवा बंद होने से कुल्लू–मनाली पहुंचना भी मुश्किल हो गया।
कुल्लू, मनाली और लाहौल–स्पीति के होमस्टे महीनों से खाली पड़े हैं। टैक्सी चालकों को हफ्ते में एक-दो सवारी भी मुश्किल से मिल रही है। एचपीटीडीसी तक को अपने घाटे वाले 14 होटल निजी क्षेत्र को देने का फैसला करना पड़ा।
हालांकि सरकार ने 5 करोड़ पर्यटक लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और छूट पैकेज के साथ ईको-टूरिज्म नीति शुरू की है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं और बुनियादी ढांचे की खस्ता हालत ने योजनाओं पर ग्रहण लगा दिया है।
पर्यटन विभाग का कहना है कि अब प्राथमिकता अनछुए गंतव्यों को विकसित करने, सुरक्षित माहौल बनाने और आपदा प्रबंधन पर फोकस करने की है। उम्मीद है कि सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों से हिमाचल का पर्यटन फिर से अपनी रौनक वापस पाएगा।