16 साल बाद भगवान रघुनाथ का रथ सजेगा नए कपड़े से, कुल्लू दशहरे की तैयारियां तेज
कुल्लू/28/09/2025
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में इस बार कुल्लू दशहरा उत्सव और भी खास होने वाला है, क्योंकि 16 साल बाद भगवान रघुनाथ के लकड़ी के रथ का कपड़ा बदला जाएगा। भगवान रघुनाथ अपने रथ पर सवार होकर अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के अवसर पर ढालपुर के अस्थाई शिविर में पहुंचते हैं। इस बार नए कपड़े से सजाए जाने वाले रथ को 300 मीटर लंबे कपड़े से ढंका जाएगा।
कपड़े की सिलाई पारंपरिक परंपरा के अनुसार सरवरी में दर्जी सूबे राम ने की है और नया कपड़ा भुंतर से खरीदा गया है। रथ की सीढ़ियों और अन्य हिस्सों में भी बदलाव किया गया है। 1 अक्टूबर तक रथ तैयार हो जाएगा और 2 अक्टूबर को इसे ढालपुर मैदान में लाकर पूजा-अर्चना के बाद नए कपड़े से सजाया जाएगा।
भगवान रघुनाथ का रथ जमदग्रि ऋषि की भेंट की गई लकड़ी से बनता है और इसका निर्माण केवल कुछ चुनिंदा लोगों को ही करने का अधिकार है। रथ खींचने के लिए प्राचीन समय से रस्सा बनाया जाता रहा है, जो आज भी खराहल घाटी के देहणीधार, हलैणी, बंदल और सेऊगी गांव के लोगों द्वारा तैयार किया जाता है। पुराने समय में रस्सा बगड़ घास का होता था, लेकिन अब साधारण रस्से का उपयोग किया जाता है।
रथ यात्रा 2 अक्टूबर को दोपहर में ढालपुर के लिए शुरू होगी। वहां पहुंचने पर पुजारी रथ की पूजा करेंगे और भगवान रघुनाथ, माता सीता और हनुमान जी की मूर्तियां रथ पर विराजमान होंगी। इसके बाद हजारों लोग रस्सी से रथ खींचते हुए इसे अस्थाई शिविर तक ले जाएंगे। परंपरा के अनुसार रथ पर केवल पुजारी ही विराजमान रहते हैं।
इस बदलाव से न सिर्फ दशहरे की भव्यता बढ़ेगी, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।