शिमला में 12 साल के बच्चे की आत्महत्या का मामला, तीन महिलाओं पर SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज
शिमला/28/09/2025
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के रोहड़ू उपमंडल के तहत आने वाली उपतहसील जांगला के लिंबड़ा गांव में 12 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया है। आरोप है कि गांव की तीन महिलाओं ने मासूम को बेरहमी से पीटा और गौशाला में बंद कर दिया था। इस प्रताड़ना से आहत होकर बच्चे ने जहर खा लिया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना ऐसे हुई
मृतक के पिता बिट्टू निवासी लिंबड़ा गांव ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 16 सितंबर की शाम करीब 7:30 बजे जब वह घर पहुंचे तो उनका बेटा अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़ा था। परिवारजन तुरंत उसे नागरिक अस्पताल रोहड़ू ले गए, जहां से डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने पर उसे आईजीएमसी शिमला रेफर कर दिया। लेकिन 17 सितंबर की रात करीब 1:30 बजे इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। बाद में पता चला कि उसने जहरीला पदार्थ निगला था।
मां ने किया बड़ा खुलासा
18 सितंबर को जब परिवार घर लौटा तो मृतक की मां सीता देवी ने पुलिस को बताया कि उसी दिन गांव की तीन महिलाओं ने उसके बेटे को घर छूने के कारण पीटा और गौशाला में बंद कर दिया था। मां के अनुसार यह जातिगत प्रताड़ना का मामला है क्योंकि बच्चा अनुसूचित जाति से संबंध रखता था। अपमान और मारपीट से आहत होकर उसने जहर खा लिया।
पुलिस जांच और मुकदमा
बच्चे की मौत के बाद 20 सितंबर को उसके पिता ने पुलिस थाना चिड़गांव में लिखित शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत और मां के बयान के आधार पर पुलिस ने गांव की पुष्पा देवी सहित तीन महिलाओं के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, पिटाई करने और जातिगत प्रताड़ना के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।
एसडीपीओ रोहड़ू प्रणव चौहान ने बताया कि मामला गंभीर है और जांच डीएसपी रोहड़ू को सौंपी गई है। तीनों महिलाओं ने अग्रिम जमानत ले ली है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC-ST Act) के तहत केस दर्ज किया है।
सामाजिक सवाल
यह दर्दनाक घटना न केवल एक मासूम की जान ले गई, बल्कि समाज में अभी भी मौजूद जातिगत भेदभाव और कुप्रथाओं पर गहरे सवाल खड़े कर रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना के पीछे असली वजह क्या थी और महिलाओं ने बच्चे के साथ इतना अमानवीय व्यवहार क्यों किया।