राजनाथ सिंह का चेतावनी भरा बयान: अवैध प्रवासी और शरणार्थी बन रहे भारतीय समुद्री सुरक्षा के लिए चुनौती
नई दिल्ली/29/09/2025
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को तटरक्षक कमांडरों के सम्मेलन में भारत की समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में अस्थिरता और अवैध प्रवासी, शरणार्थियों की आमद, बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में भारत के समुद्री सुरक्षा के लिए चुनौती पेश कर रही हैं।
राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा,
“हमारे पड़ोसी देशों की गतिविधियां किसी से छिपी नहीं हैं। हमारे आसपास अस्थिरता है और यह हमारे समुद्री क्षेत्र, विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी को प्रभावित करती है। शरणार्थियों की आमद और अवैध प्रवासी हमारी तटीय सुरक्षा के लिए चुनौती हैं। हमें केवल नियमित निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दोहरे मोर्चे पर नजर रखनी होगी। समुद्री सुरक्षा केवल जहाजों तक सीमित नहीं है; भू-राजनीतिक जागरूकता और तैयारी भी आवश्यक है।”
तटरक्षक बल और आत्मनिर्भर भारत पहल
राजनाथ सिंह ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि तटरक्षक बल के जहाजों की सर्विसिंग और मरम्मत भारत में ही की जा रही है, और तटरक्षक बल के 90 प्रतिशत बजट का उपयोग स्वदेशी संपत्तियों के विकास में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा,
“सरकार आपको अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है। हम मशीन और मानव शक्ति दोनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम भारतीय तटरक्षक बल को सभी आवश्यक आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। केवल रक्षा क्षेत्र में ही नहीं, भारत आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर भी बढ़ रहा है।”
सम्मेलन का महत्व
तीन दिवसीय सम्मेलन 28 सितंबर को नई दिल्ली स्थित तटरक्षक मुख्यालय में शुरू हुआ। आईसीजी के अनुसार, यह सम्मेलन समुद्री सुरक्षा, संरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने में तटरक्षक बल की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। सम्मेलन का उद्देश्य सुरक्षित, स्थिर और लचीले समुद्री क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है।
राजनाथ सिंह की चेतावनी इस बात का संकेत है कि भारत को समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार सतर्क रहना होगा। अवैध प्रवासियों और शरणार्थियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए तटरक्षक बल की तैयारी, मॉनीटरिंग और स्वदेशी तकनीक का महत्व और बढ़ गया है।