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लखनऊ बना धर्मांतरण का गढ़, 1000 से अधिक हिंदू बने ईसाई

लखनऊ/30/09/2025

isayio

लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज, नगराम, निगोहां और गोसाईगंज के कुछ इलाकों में पिछले तीन दशकों से धर्मांतरण का नेटवर्क सक्रिय है। स्थानीय लोगों और पुलिस जांच के अनुसार, यहां लगभग एक हजार से अधिक हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया गया।

धर्मांतरण में मुख्य भूमिका निभाने वाले पादरी मलखान और उसके सहयोगियों ने गरीब और दलित वर्ग के लोगों को आर्थिक मदद, राशन और गंभीर बीमारियों जैसे गठिया, सांस, कैंसर और किडनी की समस्याओं का झांसा देकर ईसाई धर्म अपनाने पर मजबूर किया। मोहनलालगंज में अकेले मलखान ने करीब 500 ग्रामीणों को ईसाई बनाया, जहां अब पांच बड़े चर्च और कई छोटे प्रार्थना स्थल हैं। 80 और 90 के दशक में मोहनलालगंज में केवल एक चर्च था।

ग्रामीणों के अनुसार, प्रार्थना सभा स्थलों पर हर रविवार लोगों की भीड़ रहती है। महीने में दो बार बड़े स्तर पर चंगाई सभा आयोजित की जाती है। इसमें प्रोजेक्टर पर यीशु से संबंधित फिल्म दिखाकर लोगों को फंसाया जाता है। मोहनलालगंज स्थित एक अस्पताल में लोगों का निःशुल्क इलाज कराया जाता, जिससे एससी वर्ग के लोगों का भरोसा जीतकर वे ईसाई धर्म स्वीकार कर लेते हैं।

शैक्षणिक संस्थान और धार्मिक नियम

मोहनलालगंज और आसपास के इलाके में कई शिक्षण संस्थान ईसाई समाज के हैं। इनमें पढ़ने वाले हिंदू लड़कों को कलावा बांधने, टीका लगाने और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने से रोका जाता है। इन संस्थानों में ईसाई छात्रों को ही नौकरी मिलने की व्यवस्था है। कुछ लोग दक्षिण भारत से काम के लिए आते हैं और वहां धर्मांतरण का शिकार हो जाते हैं।

ग्राम समाज की जमीन पर प्रार्थना स्थल

निगोहां में मलखान ने ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर प्रार्थना सभा स्थल बना रखा था। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में यह खुलासा किया। एसीपी मोहनलालगंज रजनीश वर्मा ने तहसील प्रशासन को पत्र लिखकर विवरण मांगा है और बुलडोजर चलाने की तैयारी की जा रही है। मलखान के मोबाइल में व्हाट्सएप पर चंगाई सभा ग्रुप भी मिला, जिसमें 132 लोग जुड़े थे और ईसाई धर्म अपना चुके हैं।

मूर्ति पूजन और सामाजिक लाभ

पुलिस के अनुसार, ईसाई बनने के बाद लोग मूर्ति पूजन बंद कर देते हैं, लेकिन अनुसूचित जाति के आरक्षण और अन्य सामाजिक लाभ प्राप्त करते रहते हैं। मलखान खुद एससी वर्ग का है और सभा में ‘मैथ्यू’ नाम से जाना जाता है।

धार्मिक टोली और फंडिंग जांच

ग्रामीणों के अनुसार, भोलाखेड़ा, फुलवरिया और बक्तौरी खेड़ा के लोग धर्मांतरण के बाद रविवार प्रार्थना सभाओं के बाद टोलियों में निकलते हैं और धार्मिक पुस्तकों का वितरण करते हैं। पुलिस उपायुक्त दक्षिणी निपुण अग्रवाल ने बताया कि मलखान के दो बैंक खातों (बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक) की जांच की जा रही है। फंडिंग स्रोत और विदेशी मदद की भी जांच की जा रही है।

मलखान का पहले जीवन साधारण मजदूरी करने वाला था, लेकिन धर्मांतरण के बाद उसकी जीवनशैली, पहनावा और बोलचाल में बड़ा बदलाव देखा गया। वह सभा के दौरान हिंदू देवी-देवताओं को नकारता है और ‘ईसा मसीह’ को सर्वोच्च बताता है।

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