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सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ शिमला में सीपीआई (एम) का प्रदर्शन, केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

शिमला/01/10/2025

pradarshan

शिमला: लद्दाख के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) जिला कमेटी शिमला ने उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे तानाशाही रवैया करार दिया और वांगचुक की तुरंत रिहाई की मांग की।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पार्टी जिला सचिव विजेंद्र मेहरा, जगमोहन ठाकुर, बालक राम और अनिल ठाकुर ने कहा कि सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे थे। उनकी गिरफ्तारी को नेताओं ने जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्रता पर हमला बताया।

उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने लद्दाख के लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय दमनकारी नीतियों का सहारा लिया है। वांगचुक को कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लेना इस बात का प्रमाण है कि सरकार लद्दाख की वास्तविक आकांक्षाओं की अनदेखी कर रही है।

सीपीआई (एम) नेताओं ने बताया कि इस हिंसक कार्रवाई में चार लोगों की मौत हुई है और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने इसे अमानवीय बताते हुए कहा कि यह कदम लद्दाख सहित जम्मू-कश्मीर के लोगों में अलगाव को और गहरा करेगा।

पार्टी नेताओं ने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि –

सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए। आंदोलनकारियों पर थोपे गए सभी मामले वापस लिए जाएं। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। जनता के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने बताया कि लद्दाख के लोग पिछले छह वर्षों से राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। लेह एपेक्स बॉडी और अन्य संगठनों ने हाल ही में 15 दिनों की शांतिपूर्ण भूख हड़ताल की थी। मगर सरकार ने सार्थक बातचीत करने के बजाय आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी का रास्ता चुना।

सीपीआई (एम) नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने पारंपरिक रूप से शांतिपूर्ण माने जाने वाले लद्दाख में विरोध और अशांति का माहौल खुद पैदा किया और अब आंदोलनकारियों को ही दोषी ठहराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह तुरंत दमनकारी उपाय बंद करे और आंदोलन के प्रतिनिधियों से बातचीत कर जनता की जायज मांगों को स्वीकार करे।

ladhak
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