ट्रंप ने फिर उठाई नोबेल शांति पुरस्कार की मांग, बोले – सात युद्ध रुकवाए, अब अनदेखी बर्दाश्त नहीं
वॉशिंगटन/02/10/2025
वॉशिंगटन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया तो यह न केवल उनके लिए बल्कि पूरे अमेरिका के लिए बड़ा अपमान होगा। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद अब तक सात बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराया है और अगर गाजा संघर्ष भी थम गया तो यह उनकी आठवीं ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
ट्रंप का दावा – सात युद्ध रुकवाए
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद महज आठ महीनों में सात अलग-अलग युद्धों को रुकवाया है। इनमें भारत-पाकिस्तान, थाईलैंड-कंबोडिया, आर्मेनिया-अजरबैजान, कोसोवो-सर्बिया, इज़रायल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया और रवांडा-कांगो के संघर्ष शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध न रुकवा पाने के बावजूद वह नोबेल शांति पुरस्कार के सबसे बड़े दावेदार हैं, क्योंकि उन्होंने पहले ही कई जानलेवा संघर्ष समाप्त कर दिए हैं।
“हर सीजफायर के लिए मिलना चाहिए नोबेल”
अमेरिकन कॉर्नरस्टोन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि उन्हें अब तक रुकवाए गए हर युद्ध के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उनके अनुसार –
“मैंने भारत और पाकिस्तान सहित सात युद्ध रोके हैं। लेकिन मुझे कहा जाता है कि अगर मैं रूस-यूक्रेन की जंग खत्म कराऊं तो ही नोबेल मिल सकता है। यह अन्याय है। सात युद्ध रोकने के बाद भी मेरी अनदेखी क्यों की जा रही है?”
भारत और पाकिस्तान संघर्ष को लेकर विवाद
ट्रंप ने अपने भाषण में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का श्रेय भी खुद को दिया। उन्होंने दावा किया कि 10 मई को हुए सीजफायर में उनकी भूमिका रही है। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान की ओर से भारी नुकसान झेलने के बाद उसके डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क कर सीजफायर की मांग की थी। इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी ट्रंप की मध्यस्थता के दावे को नकारा है।
संयुक्त राष्ट्र और नाटो पर निशाना
ट्रंप ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब वे लाखों लोगों की जान बचाने के लिए युद्ध रोकने में लगे हुए थे, तब संयुक्त राष्ट्र सिर्फ खोखले बयानों और पत्रों तक सीमित रहा।
उन्होंने नाटो देशों की आलोचना करते हुए कहा कि रूस से कच्चा तेल खरीदना दरअसल आतंकवादियों को मजबूती देने जैसा है।
फिलिस्तीन को मान्यता देने पर टिप्पणी
ट्रंप ने फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले देशों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि ऐसा करना हमास जैसे आतंकवादी संगठन को उनके अत्याचारों के लिए इनाम देने जैसा है।
ट्रंप पहले भी कई मौकों पर नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और भाषणों में बार-बार कहा है कि वे इस सम्मान के सबसे बड़े हकदार हैं और अब उन्हें और नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।