चीन का 'गेम प्लान' अमेरिकी डॉलर को चुनौती दे रहा, करेंसी मार्केट में भूचाल की संभावना
चीन की करेंसी रणनीति ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। अमेरिकी डॉलर की पकड़ से बाहर निकलने की कोशिश में बीजिंग तेजी से रेनमिनबी (युआन) को ट्रेड करेंसी के रूप में बढ़ावा दे रहा है। डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए उठाए गए चीन के कदम अब असर दिखाने लगे हैं। साल 2025 में चीन के कुल विदेशी व्यापार का लगभग 29% हिस्सा युआन में सेटल हो रहा है। मार्च 2025 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 54% तक पहुंच गया था।
वैश्विक पेमेंट नेटवर्क SWIFT के आंकड़े भी यही संकेत देते हैं कि युआन अब अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। दो साल पहले जहां इसका हिस्सा केवल 2% था, वहीं अब यह बढ़कर 3.5% हो गया है। इससे यह साफ हो रहा है कि चीन न केवल अपने व्यापार में बल्कि ग्लोबल लेन-देन में भी डॉलर की पकड़ कमजोर करने में सफल हो रहा है।
चीन लंबे समय से अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए ट्रेड सेटलमेंट में युआन का इस्तेमाल बढ़ाना मुख्य रणनीति है। इस कदम से चीन को कई फायदे मिलते हैं। सबसे पहले विदेशी व्यापार में करेंसी रिस्क कम होता है। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में डॉलर की बजाय अपनी मुद्रा पर भरोसा बढ़ता है। तीसरा, युआन को ग्लोबल रिज़र्व करेंसी के रूप में प्रमोट करने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह रुझान जारी रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में युआन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में दूसरी सबसे बड़ी करेंसी बन सकता है। हालांकि, डॉलर को पूरी तरह चुनौती देने में अभी समय लगेगा क्योंकि डॉलर दशकों से वैश्विक ट्रेड और रिज़र्व करेंसी के रूप में संस्थागत और ऐतिहासिक दोनों स्तरों पर मजबूत है।
चीन का यह कदम वैश्विक करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव ला सकता है और एशिया में युआन की ताकत को और बढ़ा सकता है।