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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 9 बच्चों की मौत के बाद कफ सिरप पर जारी की एडवाइजरी

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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामलों पर संज्ञान लिया है। पिछले एक हफ्ते से खबरें सामने आई थीं कि कफ सिरप पीने से कम से कम 9 बच्चों की मौत हुई। इसके बाद मंत्रालय ने सभी राज्यों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।

एडवाइजरी में माता-पिता को चेताया गया है कि यदि बच्चा 2 साल से कम उम्र का है, तो उसे खांसी और जुकाम की कोई दवा बिल्कुल नहीं दी जाए। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एसोसिएट प्रोफेसर और बाल रोग प्रमुख डॉ. पवन नंदुरकर के मुताबिक बच्चों को पहले जुकाम, खांसी और बुखार हुआ, जिसके बाद उनकी किडनी खराब हो गई। प्रारंभिक जांच में बच्चों की मौत और किडनी खराब होने के मामलों का संबंध कफ सिरप से हो सकता है, लेकिन जांच जारी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC), नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) और राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम ने साइट का दौरा किया और कई खांसी की दवाओं के नमूने इकट्ठा किए। प्रारंभिक जांच में किसी भी नमूने में Diethylene Glycol (DEG) या Ethylene Glycol (EG) नहीं पाया गया। राजस्थान में मृत बच्चों से जुड़े प्रोडक्ट में Propylene Glycol नहीं पाया गया और यह दवा Dextromethorphan आधारित है, जिसे बच्चों के लिए अनुशंसित नहीं किया गया है।

राजस्थान सरकार ने जांच कमेटी बनाई है जो अगले कुछ दिनों में रिपोर्ट देगी। राज्य ड्रग कंट्रोलर अजय पाठक ने बताया कि सिकर और भरतपुर में Dexamethasone सिरप के सेवन के बाद बच्चों के बीमार होने की शिकायतें मिली थीं। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि मौतें संदूषित खांसी की दवा से संबंधित नहीं हैं।

मध्य प्रदेश सरकार ने Coldrif और Nextro-DS खांसी की दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। तमिलनाडु सरकार ने भी 3 अक्टूबर को Coldrif खांसी की दवा की बिक्री पर रोक लगाई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को बाल चिकित्सा में खांसी की दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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