जय राम ठाकुर का हमला: हिमाचल सरकार अमानवीय, जनता को राहत नहीं, तकलीफ दे रही है
हिमाचल प्रदेश में आपदा के बाद भी जनता की पीड़ा कम नहीं हो रही है। सड़कें टूट चुकी हैं, लोग अपने घर-परिवार को खो चुके हैं, और अब उन्हें न्याय और राहत के बजाय सरकारी अत्याचार झेलना पड़ रहा है। इस पूरे मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया है।
जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की सरकार पूरी तरह अमानवीय और अराजक हो चुकी है। सरकार को न उच्च न्यायालय के आदेशों की परवाह है और न ही उन पीड़ित परिवारों की, जिन्होंने आपदा में सब कुछ खो दिया है।
उन्होंने बताया कि पाण्डव शिला से धार के बीच की सड़क आपदा में पूरी तरह बह गई थी। उच्च न्यायालय ने इस सड़क को फिर से एंबुलेंस रोड के रूप में बहाल करने के आदेश दिए थे, ताकि आपात स्थिति में लोगों को राहत मिल सके। लेकिन दुर्भाग्यवश, सरकार और प्रशासन ने स्थानीय कांग्रेस नेता के दबाव में काम रुकवा दिया।
स्थानीय लोगों ने अपने पैसे से मशीन लगाकर सड़क बनानी शुरू की थी, ताकि मलबे में दबे शवों को खोजा जा सके। लेकिन वन विभाग और लोक निर्माण विभाग ने उस काम को रोक दिया। लोगों द्वारा लगाई गई मशीन जब्त कर ली गई और पंचायत प्रधान पर एफआईआर दर्ज कर दी गई।
जय राम ठाकुर ने कहा कि यह सरकार की संवेदनहीनता और सत्ता के नशे की पराकाष्ठा है। लोग डेढ़ घंटे तक पैदल चलने को मजबूर हैं। बीते दिनों एक बच्चा ढांक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया, उसे सिर में गहरी चोट आई है। ऐसे में बुजुर्गों और बीमारों की हालत का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि तीन शव अभी भी मलबे में दबे हुए हैं, लेकिन सड़क बंद होने के कारण मशीनें वहां तक नहीं पहुंच पा रही हैं। परिजन सरकार से केवल सड़क की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने प्रियजनों के शव निकालकर अंतिम संस्कार कर सकें, जिससे उन्हें मुक्ति और मन को शांति मिल सके।
जय राम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री को भी दे दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही “संवेदनशील सरकार” का उदाहरण है? क्या सत्ता में बैठे लोग इतने निर्दयी हो गए हैं कि जनता की पीड़ा भी अब उन्हें नहीं दिखती?
जय राम ठाकुर ने कहा,
“सरकार अगर तानाशाही पर उतर आई है तो हम भी देखेंगे कि उसकी फासीवादी ताकतों में कितना दम है।
हम जनता के साथ खड़े थे, खड़े हैं और खड़े रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि मानवता और न्याय का है। जनता को अब यह तय करना होगा कि उन्हें “संवेदनहीनता की राजनीति” चाहिए या “जनसेवा की नीति”।