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मगध में मुस्लिमों की नाराजगी बढ़ी: ओवैसी और प्रशांत किशोर बन सकते हैं विकल्प

बिहार/08/10/2025

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बिहार के मगध क्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मुस्लिम समुदाय में नाराजगी फैल रही है। इस बार एनडीए और महागठबंधन ने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया, जिससे मुस्लिम मतदाता असंतुष्ट हैं। गया जिले की 26 विधानसभा सीटों वाला यह क्षेत्र सियासी महत्व का केंद्र माना जाता है, क्योंकि सत्ता में आने के लिए इन सीटों पर जीत बेहद जरूरी है। मुस्लिम वोटरों पर नजर रखते हुए असदुद्दीन ओवैसी और प्रशांत किशोर जैसे नेता मुस्लिमों के लिए विकल्प के रूप में उभर सकते हैं।

मगध क्षेत्र में मुस्लिम आबादी लगभग 17.70 प्रतिशत है, लेकिन पिछले चुनावों में महागठबंधन और एनडीए दोनों ही गठबंधनों ने मुस्लिम नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया। राजद ने 2020 में 26 सीटों में से सिर्फ 2 मुस्लिम उम्मीदवार खड़े किए, जबकि कांग्रेस ने टिकारी और अन्य सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारे। जदयू और हम पार्टी ने भी 2010 के बाद मुस्लिम प्रत्याशी नहीं दिए। इसके चलते मुस्लिम समाज में नाराजगी और सवाल उठ रहे हैं कि आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी क्यों नहीं दी जा रही।

समाजसेवियों और मुस्लिम नेताओं का कहना है कि मुस्लिम वोट का सिर्फ चुनाव में उपयोग किया जाता है, लेकिन सियासी हिस्सेदारी नहीं दी जाती। अजहर इमाम, टिकारी नगर परिषद अध्यक्ष, कहते हैं कि मुस्लिम समुदाय के लोग मेहनत करके पार्टियों को मजबूत करते हैं, लेकिन चुनाव के समय उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लिए राजनीति में अब विकल्प तलाशना जरूरी हो गया है।

एएमआईएम के नगर अध्यक्ष आसिफ का कहना है कि मगध में मुस्लिमों की राजनीतिक भागीदारी खत्म हो चुकी है और ओवैसी की पार्टी मुस्लिमों के लिए अब एक विकल्प बन सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर महागठबंधन और एनडीए मुस्लिमों को पर्याप्त सीटें नहीं देंगे, तो मुस्लिम मतदाता नए विकल्पों की ओर जाएंगे। इससे आगामी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी और सियासी समीकरण बदल सकते हैं।

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