पालमपुर जा रही HRTC बस का टायर निकलने से मचा हड़कंप, चालक की सूझबूझ से 40 यात्रियों की जान बची
भवारना/08/10/2025
मंडी–पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग-154 पर बुधवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दरअसल, 40 सवारियों से भरी हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बस का पिछला टायर अचानक निकल गया, लेकिन चालक की सूझबूझ और समय रहते नियंत्रण के कारण सभी यात्री बाल-बाल बच गए। यह हादसा परौर के पास राधा स्वामी सत्संग के तीखे मोड़ पर हुआ।
बस जम्मू के कटरा से पालमपुर जा रही थी। दोपहर करीब 2 बजे जब बस परौर के पास पहुंची, तभी अचानक एक जोरदार झटका लगा और पिछला टायर अलग होकर सड़क पर लुढ़क गया। बस में बैठे यात्री घबरा गए और चीख-पुकार मच गई, लेकिन उस समय बस चढ़ाई पर थी, जिससे चालक ने समझदारी दिखाते हुए बस पर नियंत्रण पा लिया। इस तरह एक बड़ी त्रासदी टल गई और सभी यात्री सुरक्षित रहे।
घटना के बाद यात्रियों को दूसरी बस में बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। हादसे के बाद परिवहन निगम की कार्यप्रणाली और तकनीकी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कटरा से पालमपुर की दूरी लगभग 258 किलोमीटर है, ऐसे में यात्रियों का सवाल है कि इतनी लंबी दूरी तय करने से पहले बस की तकनीकी जांच क्यों नहीं की गई?
अक्सर ऐसी घटनाओं में देखा गया है कि टायर बदलने के बाद ढीले छोड़े गए नट-बोल्ट हादसों का कारण बनते हैं। यह लापरवाही न केवल यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ है, बल्कि निगम के तकनीकी स्टाफ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है।
इस मामले पर पालमपुर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) नितेश शर्मा ने बताया कि चालक और परिचालक के अनुसार घटना से कुछ देर पहले बस द्रमण में भोजन के लिए रुकी थी, जहां उन्होंने टायरों की जांच भी की थी। उस समय किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी नजर नहीं आई। आरएम शर्मा ने कहा कि हादसे की गंभीरता को देखते हुए एक जेटीओ को जांच के लिए नियुक्त किया गया है जो घटना के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा।
उन्होंने कहा, “बस का पूर्ण निरीक्षण किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि टायर निकलने की वास्तविक वजह क्या थी।”
इस घटना ने फिर एक बार यह सवाल उठाया है कि क्या हिमाचल पथ परिवहन निगम यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है या फिर लापरवाही के कारण यात्रियों की जान जोखिम में डाली जा रही है। यात्रियों ने मांग की है कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो और बसों की नियमित तकनीकी जांच अनिवार्य की जाए।