हिमाचल: आउटसोर्स कर्मचारियों को नहीं मिला सितंबर का वेतन, सरकार की उदासीनता पर बढ़ा रोष
हिमाचल प्रदेश के लगभग 45,000 आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए आर्थिक संकट गहरा गया है। पूर्व अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ शैलेन्द्र शर्मा ने बताया कि अक्टूबर की 9 तारीख बीत जाने के बावजूद, कर्मचारियों को सितंबर माह का वेतन भी नहीं मिला है। ये वही कर्मचारी हैं, जो पिछले दो दशकों से औसतन ₹10,000 मासिक वेतन में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। उच्च न्यायालय द्वारा इन कर्मचारियों के नियमितीकरण के आदेश दिए जाने के बावजूद, सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
त्योहारों के इस समय में, जब पूरा प्रदेश करवा चौथ और दिवाली की तैयारियों में लगा है, वहीं ये कर्मचारी अपने परिवार के भरण-पोषण को लेकर परेशान हैं। सरकारी दफ्तरों में दिन-रात काम करने वाले ये लोग खुद अपने घर की रसोई तक चलाने में असमर्थ हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि खुद को “गरीबों की सरकार” कहने वाली सुखू सरकार ने अब तक उनकी समस्याओं पर कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। बढ़ती महंगाई और समय पर वेतन न मिलने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार ने शीघ्र वेतन जारी करने और नियमितीकरण पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन या हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
मुख्य मांगें:
सितंबर माह का वेतन तत्काल जारी किया जाए।
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का शीघ्र नियमितीकरण किया जाए।
शैलेन्द्र शर्मा ने राज्य सरकार से अपील की है कि कर्मचारियों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की जाए ताकि त्योहारों के इस मौसम में उनकी आर्थिक परेशानियों का समाधान हो सके।