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काबुल में धमाका, अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी भारत दौरे पर

काबुल/10/10/2025

KABUL

काबुल: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुवार देर रात एक विस्फोट हुआ। अफगान अधिकारियों ने बताया कि अब्दुल हक चौराहे के पास यह घटना हुई, जहां एक लैंड क्रूजर गाड़ी को टक्कर लगी। स्थानीय निवासियों ने बताया कि विस्फोट के बाद अब्दुल हक चौराहे को बंद कर दिया गया, जिससे इलाके में भारी ट्रैफिक जाम हो गया।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल साइट X पर कहा कि "काबुल शहर में एक विस्फोट की आवाज सुनी गई, हालांकि किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। घटना की जांच चल रही है और अभी तक किसी नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है।"

यह घटना ऐसे समय हुई जब अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत दौरे पर नई दिल्ली आए हैं। उनके दौरे की अवधि 9 से 16 अक्टूबर तक है और यह अगस्त 2021 के बाद काबुल से भारत आने वाला पहला उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को उनके आगमन की घोषणा करते हुए कहा कि भारत और अफगानिस्तान द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तत्पर हैं। मुत्ताकी अपने भारतीय समकक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर काबुल और नई दिल्ली के बीच संबंधों को बढ़ाने सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार करेंगे।

हालांकि भारत तालिबान को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देता, लेकिन विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार के साथ निरंतर संपर्क जारी है। इसमें हाल ही में आए भूकंप के बाद मानवीय सहायता और राजनयिक आदान-प्रदान शामिल है।

मुत्ताकी की यात्रा तालिबान सरकार द्वारा क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संबंध मजबूत करने के नए प्रयास का प्रतीक है। इससे पहले मई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनसे फोन पर बात की थी और विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस साल की शुरुआत में दुबई में मुलाकात की थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मुत्ताकी के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी, जिससे उन्हें 9 अक्टूबर से एक सप्ताह के लिए भारत में रहने की अनुमति मिली।

मुत्ताकी मॉस्को फ़ॉर्मेट परामर्श की 7वीं बैठक में भाग लेने के बाद भारत पहुंचे। इस परामर्श में अफगानिस्तान, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में सीमा पार आर्थिक गलियारों और बुनियादी ढांचे की पहल में अफगानिस्तान की भागीदारी बढ़ाने का समर्थन किया गया।

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