हिमाचल में पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के प्रयास: ग्रीन बोनस से राज्य को मिलेगा लाभ
शिमला /10/10/2025
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि कृषि, बागवानी, पशुपालन, वानिकी, उद्योग और परिवहन जैसे सभी क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए विकास के नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 31 मार्च, 2026 तक हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए राज्य की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 90 प्रतिशत नवीकरणीय या हरित ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करना आवश्यक है। वर्तमान में ऊर्जा खपत लगभग 14,000 मिलियन यूनिट है और इसमें से 12,600 मिलियन यूनिट नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने पर हिमाचल हरित राज्य बन सकेगा।
परिवहन क्षेत्र में सुधार के तहत हिमाचल पथ परिवहन निगम डीजल बसों को ई-बसों से बदल रहा है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आई है। निगम ने 297 ई-बसों की खरीद के लिए 412 करोड़ रुपये की निविदाएं जारी की हैं और 124 करोड़ रुपये से बस अड्डों पर ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 500 और ई-बसें खरीदी जाएंगी।
इसके अलावा, राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को ई-टैक्सी खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। अब तक 59 पात्र युवाओं को लगभग 4.22 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है। योजना के तहत सरकारी विभागों में ई-टैक्सी को पांच साल के लिए अटैच किया जाएगा और उसके बाद दो साल के लिए विस्तार का प्रावधान है।
प्रदेश में छह ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए हैं, जिनमें ई-वाहनों के संचालन के लिए चार्जिंग स्टेशनों सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। शीघ्र ही इन कॉरिडोर में 41 अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि ई-वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स छूट और विशेष रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट दी गई है। इसके साथ ही प्रदेश में चल रहे सभी पेट्रोल और डीजल ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से ई-ऑटो रिक्शा से बदला जा रहा है।
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक संपदा, स्वच्छ हवा, मिट्टी और अनुकूल जलवायु राज्य के लिए महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र है। राज्य सरकार ने केंद्र और 16वें वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखा है। पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के एवज में हिमाचल को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये ग्रीन बोनस के रूप में मिलने की संभावना है।