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प्रदेश में संवैधानिक संकट: भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर लगाया लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हनन का आरोप

शिमला/10/10/2025

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शिमला। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनावों को स्थगित कर लोकतंत्र की मर्यादाओं का हनन किया है। रणधीर ने बताया कि पहले शहरी निकाय चुनाव को टालने की कोशिश की गई और अब कई जिलों के उपायुक्तों से पत्र मंगवाए गए। इन पत्रों में यह लिखा गया कि जिलों की स्थिति आपदा के कारण ठीक नहीं है और रोड नेटवर्क सुचारू रूप से नहीं चल रहा, इसलिए अभी चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है।

रणधीर ने बताया कि ये पत्र सचिव पंचायती राज के पास कांग्रेस द्वारा भेजे गए और तुरंत बाद डिजास्टर मैनेजमेंट सेल ने आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के माध्यम से आदेश जारी कर दिए, जिसमें इस साल हुई भारी बारिश के कारण हुए नुकसान का विवरण दिया गया और कहा गया कि ऐसे समय में चुनाव तब तक नहीं हो सकते जब तक रोड नेटवर्क पूरी तरह से बहाल नहीं हो। इस आदेश की कॉपी सभी जिलाधीशों, राज्य निर्वाचन आयोग और अन्य विभागों के सचिवों एवं निदेशकों को भेज दी गई।

भाजपा ने इस आदेश का चौतरफा विरोध किया। रणधीर शर्मा ने कहा कि इसके बाद पंचायती राज मंत्री और मुख्यमंत्री ने समय पर चुनाव करवाने का बयान दिया, जिससे सरकार के आदेश और बयानों में विरोधाभास स्पष्ट हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव समय पर होने हैं, तो पूर्व में उपायुक्तों से मंगाए गए पत्र और डिजास्टर मैनेजमेंट प्रकोष्ठ के आदेश का क्या औचित्य था।

रणधीर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और मंत्री चाहे कुछ भी कहें, सरकार चुनाव टालना चाहती है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी इस सरकार ने शहरी निकायों के चुनाव टालने का प्रयास किया। नए शहरी निकायों का निर्माण हुआ, जिनका चुनाव 6 महीने के भीतर होना था, लेकिन सरकार ने अध्यादेश लाकर और एक्ट में बदलाव कर कार्यकाल को दो साल कर दिया। इसके बाद विधानसभा में अमेंडमेंट बिल पारित कराया गया।

रणधीर ने बताया कि नए शहरी निकायों के चुनाव दो साल तक नहीं होंगे, जबकि पुराने नगर निकायों जैसे नगर परिषद, नगर पंचायत और नगर निगम के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। इलेक्शन कमीशन ने 24 मई 2025 को पत्र जारी करके चुनाव प्रक्रिया शुरू की, जिसमें 3 शहरी निकायों की वार्ड गठन पर आपत्तियां मांगी गई और सारी जानकारी जारी की गई। लेकिन बीच में शहरी विकास विभाग के सचिव द्वारा पत्र जारी करके इस प्रक्रिया को रोका गया।

भाजपा का कहना है कि यह सुनियोजित कदम है और कांग्रेस सरकार चुनावों से भागने की नीति अपना रही है, जिससे प्रदेश में लोकतंत्र की मर्यादाओं को चोट पहुँच रही है।

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