हिमाचल हाईकोर्ट में सड़क सुरक्षा पर उठा मुद्दा: आवारा पशुओं से बढ़ते हादसों को लेकर जनहित याचिका दाखिल
शिमला/11/10/2025
शिमला: हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों पर आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या अब न्यायालय तक पहुंच गई है। राजधानी शिमला में अधिवक्ता गणेश भरवा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर कर इस गंभीर समस्या को उजागर किया। याचिका में कहा गया है कि सड़कों पर आवारा पशु न केवल सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं बल्कि मानवीय दृष्टि से भी खतरे का संकेत हैं।
भरवा ने अदालत को बताया कि प्रदेश की लगभग 9,000 गौधन खुले में सड़कों पर छोड़े गए हैं, जिससे तेज गति वाले वाहनों के लिए खतरा बढ़ गया है। हाल ही में एक पंजाबी गायक की सड़क दुर्घटना में मृत्यु ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सरकार द्वारा होटलों और रेस्तरां से वसूले जाने वाले गोवंश कल्याण उपकर (₹10 प्रति ग्राहक) का उपयोग और पारदर्शिता जांची जाए।
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब के होशियारपुर क्षेत्र की तरह हिमाचल में भी आवारा पशुओं से हादसे आम नहीं होने चाहिए। न्यायालय ने राज्य सरकार को वित्तीय वर्ष 2023-25 तक उपकर से एकत्र धन का पूरा विवरण प्रस्तुत करने और इस विषय पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान यह भी सुझाव दिया गया कि हर जिले में स्थायी गौशालाओं और शेल्टर होम्स का निर्माण किया जाए, ताकि सड़कों पर आवारा पशुओं की संख्या को नियंत्रित किया जा सके और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो। अगली सुनवाई नवंबर में तय की गई है, जिसमें अन्य लंबित जनहित याचिकाओं को भी एक साथ सुना जा सकता है।