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भारत–EFTA समझौता: 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख नौकरियों से अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

हैदराबाद/12/10/2025

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भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुआ व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ है और इसके तहत अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख नई नौकरियों के सृजन का लक्ष्य रखा गया है। यह भारत का पहला ऐसा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है जो चार विकसित यूरोपीय देशों — स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन — के साथ हुआ है।

यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और ‘मेक इन इंडिया’ व ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को नई ऊर्जा देगा। TEPA की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश और रोजगार सृजन से जुड़े प्रावधान बाध्यकारी हैं — यानी ये केवल वादे नहीं बल्कि लागू करने योग्य दायित्व हैं।

इस साझेदारी के तहत EFTA देशों ने अपनी 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायतें दी हैं, जिससे भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को प्राथमिकता मिलेगी। वहीं, भारत ने 82.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों में बाजार पहुंच की अनुमति दी है, लेकिन डेयरी, सोया, कोयला और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान की गई है ताकि घरेलू उद्योगों पर असर न पड़े।

इस समझौते से भारत को न केवल विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़त मिलेगी, बल्कि सेवा क्षेत्र को भी बड़ा लाभ होगा। TEPA विशेष रूप से आईटी, शिक्षा, बिजनेस प्रोसेसिंग, नर्सिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और वास्तुकला जैसे पेशेवर क्षेत्रों में भारतीय विशेषज्ञों के लिए नए अवसर खोलेगा। Mutual Recognition Agreements (MRA) के जरिए भारतीय पेशेवरों को यूरोप में काम करने की अनुमति और मान्यता प्रक्रिया आसान हो जाएगी, जिससे भारत का कुशल श्रमबल वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करेगा।

भारत की जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 55 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में TEPA से इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और डिजिटल वितरण, व्यवसायिक उपस्थिति और व्यावसायिक सेवाओं के निर्यात को नया विस्तार मिलेगा।

निर्यात के मोर्चे पर भी यह समझौता भारत के लिए फायदेमंद साबित होगा। विनिर्माण, रसायन, चमड़ा, इंजीनियरिंग, रत्न और आभूषण जैसे उत्पादों पर टैरिफ कम या समाप्त होंगे। बासमती चावल, दालें, अंगूर, कॉफी और समुद्री उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में कम शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। इससे भारत का निर्यात बढ़कर नए उच्च स्तर पर पहुंच सकता है।

EFTA देशों से आने वाला निवेश अगले 15 वर्षों में दो चरणों में होगा — पहले 10 वर्षों में 50 अरब डॉलर, और उसके बाद के पांच वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर। यह पूंजी नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा, जीवन विज्ञान, डिजिटल प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में लगाई जाएगी। इसके लिए फरवरी 2025 से एक भारत–EFTA डेस्क भी स्थापित की गई है, जो विदेशी निवेशकों को एकल-खिड़की सुविधा प्रदान कर रही है।

घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए भारत ने टैरिफ में कटौती को 5 से 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला लिया है। इससे स्थानीय विनिर्माताओं को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने का समय मिलेगा।

कुल मिलाकर, भारत–EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA) न केवल भारत के निर्यात और निवेश में वृद्धि करेगा, बल्कि रोजगार सृजन, तकनीकी सहयोग और सतत विकास की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार और नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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