नेपाल के बाद अब अफ्रीका में भड़की Gen-Z क्रांति: मेडागास्कर के राष्ट्रपति एंड्री राजोइलिना देश छोड़कर फरार
नेपाल में शुरू हुआ Gen-Z प्रोटेस्ट अब अफ्रीका तक पहुंच गया है। पूर्वी अफ्रीका के द्वीपीय देश मेडागास्कर में बीते तीन हफ्तों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। हालात इतने बिगड़ गए कि राष्ट्रपति एंड्री राजोइलिना को देश छोड़कर भागना पड़ा। राजधानी एंटानानारिवो में हजारों युवाओं ने सोमवार, 13 अक्टूबर को सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और राष्ट्रपति से इस्तीफा मांगा। प्रदर्शन के बाद से ही राष्ट्रपति के ठिकाने का कोई पता नहीं चल पाया है।
खबरों के अनुसार, मेडागास्कर में यह विरोध आंदोलन 25 सितंबर से शुरू हुआ था, जब लोगों ने बिजली और पानी की कमी को लेकर प्रदर्शन किए। धीरे-धीरे यह विरोध भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि वे सरकार की नाकामी, भ्रष्टाचार और खराब शासन व्यवस्था से परेशान हैं। उनका आरोप है कि राष्ट्रपति और उनकी सरकार ने वर्षों से सिर्फ खुद को अमीर बनाया, जबकि आम नागरिकों को गरीबी और अभाव का सामना करना पड़ा।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सेना की विशेष इकाई CAPSAT ने भी बगावत कर दी और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर आई। यही यूनिट 2009 में उस समय सत्ता परिवर्तन में अहम रही थी, जब राजोइलिना ने पहली बार तख्तापलट कर सरकार संभाली थी। अब वही यूनिट सरकार के खिलाफ खड़ी हो गई है और उसने खुद को अस्थायी सैन्य प्रशासन घोषित कर दिया है।
राष्ट्रपति राजोइलिना ने सोमवार रात सोशल मीडिया पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को देखते हुए देश छोड़ना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस्तीफा नहीं देंगे और जल्द ही वापस लौटकर देश की स्थिरता बहाल करेंगे। हालांकि, उन्होंने अपने वर्तमान स्थान का खुलासा नहीं किया।
वहीं राजधानी में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। युवाओं की भीड़ लगातार प्रदर्शन कर रही है। कई सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। सेना की कुछ इकाइयां अभी भी सरकार के प्रति वफादार हैं, जिससे देश में टकराव की आशंका बढ़ गई है।
एक प्रदर्शनकारी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे राष्ट्रपति ने पिछले 16 वर्षों में केवल अपने परिवार और करीबी सहयोगियों को अमीर बनाया। आज हमारी सैलरी इतनी कम है कि खाने-पीने का खर्च भी मुश्किल से निकलता है।”
यह स्थिति नेपाल में हुए हालिया Gen-Z आंदोलन की याद दिलाती है, जहां युवाओं के व्यापक विरोध के बाद प्रधानमंत्री और पूरा मंत्रिमंडल इस्तीफा देने पर मजबूर हो गया था। अब अफ्रीका के इस छोटे से द्वीप देश में भी वही इतिहास दोहराता दिखाई दे रहा है।