NEWS CHOICE

निष्पक्ष खबर, बेबाक अंदाज

AI से खुलेगा डीपफेक का सच: IIT मंडी और हिमाचल फोरेंसिक विभाग की बड़ी पहल

धर्मशाला/14/10/2025

IIT

धर्मशाला: डिजिटल युग में बढ़ते डीपफेक खतरे से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश ने एक बड़ी पहल की है। IIT मंडी और हिमाचल फोरेंसिक विभाग मिलकर ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स विकसित कर रहे हैं, जो नकली ऑडियो, वीडियो, हैंडराइटिंग और सिग्नेचर की सटीक पहचान करने में सक्षम होंगे। इस अत्याधुनिक प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मंजूरी मिल चुकी है। खास बात यह है कि देशभर के 400 प्रोजेक्ट्स में हिमाचल का यह प्रोजेक्ट दूसरे स्थान पर रहा है, जो प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

फोरेंसिक सेवा निदेशालय हिमाचल की निदेशक डॉ. मीनाक्षी महाजन के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की लागत डेढ़ करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि बढ़ती डीपफेक तकनीक ने साइबर अपराध की दुनिया में नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं। ऐसे में एआई तकनीक के माध्यम से डीपफेक ऑडियो-वीडियो की पहचान के लिए टूल्स तैयार किए जा रहे हैं, ताकि फर्जी कंटेंट की समय रहते पहचान की जा सके।

डॉ. महाजन ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में आईआईटी मंडी की प्रमुख भूमिका होगी, क्योंकि इसे अकादमिक स्तर पर विकसित किया जा रहा है। वहीं, फोरेंसिक विभाग इसकी एप्लिकेशन और उपयोगिता पर कार्य करेगा। वर्तमान में हैंडराइटिंग और सिग्नेचर की जांच मैन्युअल प्रक्रिया से होती है, लेकिन यह प्रोजेक्ट इस प्रक्रिया को ऑटोमेट करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। इससे जांच न केवल तेज होगी बल्कि सटीकता भी बढ़ेगी।

केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने देशभर से आए लगभग 400 प्रोजेक्ट प्रपोजल में से केवल 4-5 को ही चयनित किया है। इनमें आईआईटी जोधपुर और आईआईटी मद्रास को पहला स्थान मिला है, जबकि हिमाचल का यह एआई प्रोजेक्ट दूसरे नंबर पर रहा।

यह प्रोजेक्ट न केवल डीपफेक अपराधों पर रोक लगाएगा, बल्कि फोरेंसिक तकनीक को डिजिटल स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। यह पहल आने वाले समय में हिमाचल को देश के अग्रणी साइबर फोरेंसिक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

Scroll to Top