हिमाचल में पहली बार वैज्ञानिक रूप से शरीर की बनावट पर शोध — 40 हृदयों पर जारी अध्ययन से खुलेगा चिकित्सा अनुसंधान का नया अध्याय
मंडी/17/10/2025
मंडी/नेरचौक: हिमाचल प्रदेश में पहली बार स्थानीय लोगों के शरीर की संरचना पर वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन शुरू हुआ है। श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक के विशेषज्ञों ने हृदय की बड़ी नस (कोरोनरी साइनस) और पेट की तिल्ली (स्प्लीन) के माप पर शोध कार्य शुरू किया है। इस अनोखे अध्ययन का मकसद हिमाचल की पहाड़ी आबादी के शरीर के अनुरूप अधिक सुरक्षित और सटीक मेडिकल उपकरणों का डिजाइन तैयार करना है।
एनाटॉमी विभाग द्वारा किए जा रहे इस शोध में अब तक 40 हृदयों में से 15 पर परीक्षण पूरे हो चुके हैं। अध्ययन टीम में डॉ. पंकज सोनी, डॉ. पंकज कुमार और डॉ. मनोज शामिल हैं, जबकि फॉरेंसिक विभाग सहयोग कर रहा है। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कश्यप ने बताया कि यह अध्ययन मृतकों के हृदयों पर किया जा रहा है और प्राप्त आंकड़े भविष्य में मेडिकल उपकरणों के निर्माण में सटीकता बढ़ाने में मदद करेंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक हर क्षेत्र के लोगों की शारीरिक बनावट और अंगों के आकार में भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर अंतर होता है। कोरोनरी साइनस में उपकरण डालते समय उसकी लंबाई और व्यास का सही माप बेहद अहम होता है, जबकि स्प्लीन (तिल्ली) के आकार की जानकारी से खून को फिल्टर करने और संक्रमण से लड़ने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
डॉ. कश्यप ने कहा कि यह अध्ययन स्थानीय मेडिकल शिक्षा को नई दिशा देगा और आने वाले समय में प्रदेश में रहने वाले लोगों के लिए इलाज को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाएगा।