अमेरिकी कंपनियों ने ट्रंप के $1 लाख H-1B शुल्क को अवैध बताया, अदालत में मुकदमा दायर
वॉशिंगटन/17/10/2025
वॉशिंगटन: अमेरिकी व्यापार जगत में हलचल मच गई है। अमेरिका के सबसे बड़े व्यापार संगठन यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित $100,000 H-1B वीजा शुल्क को अवैध बताते हुए गुरुवार को वॉशिंगटन की जिला अदालत में मुकदमा दायर किया। चैंबर ने इस शुल्क को "अवैध और असंवैधानिक" बताया और कहा कि इससे अमेरिकी कंपनियों को गंभीर नुकसान होगा।
याचिका में कहा गया है कि तकनीकी और नवाचार आधारित कंपनियां विदेशी कुशल कर्मचारियों पर निर्भर हैं और इस अतिरिक्त शुल्क से उनकी मजदूरी लागत बढ़ जाएगी। इससे कंपनियों को कम कर्मचारियों को नियुक्त करना पड़ेगा, जबकि अमेरिका में कई विशेष कौशल वाले श्रमिकों की कमी बनी हुई है। चैंबर ने ट्रंप के 19 सितंबर को हस्ताक्षरित राष्ट्रपति घोषणापत्र को भी कानून के खिलाफ बताते हुए "स्पष्ट रूप से अवैध" कहा।
यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष नील ब्रैडली ने बयान में कहा, “यह शुल्क अमेरिकी नियोक्ताओं के लिए वैश्विक प्रतिभा तक पहुंच असंभव बना देगा। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को और कुशल श्रमिकों की जरूरत है, कम नहीं।”
इससे पहले 3 अक्टूबर को यूनियनों, शिक्षा और धार्मिक संगठनों ने भी कैलिफोर्निया की अदालत में इसी नीति के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने इस नीति का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता कम करने के लिए मजबूर करना है।
ध्यान रहे, यह शुल्क केवल नई H-1B वीजा आवेदन पर लागू होगा और मौजूदा धारकों पर नहीं। 2024 में जारी कुल H-1B वीज़ाओं में 70% भारतीय मूल पेशेवरों को मिले थे, जिससे भारत पर इसका असर सबसे ज्यादा होने की संभावना है।