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राजनीति नहीं, समानता का संदेश: विक्रमादित्य सिंह ने लोगों से कहा — ‘मुझे राजा या टिक्का नहीं, बस विक्रमादित्य कहें

शिमला/18/10/2025

vikram

शिमला। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अपने जन्मदिन के अवसर पर मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने जनता से भावनात्मक अपील की है कि उन्हें ‘राजा’ या ‘टिक्का’ जैसे पारंपरिक संबोधनों से न पुकारा जाए, बल्कि उनके नाम ‘विक्रमादित्य’ से ही संबोधित किया जाए।

दरअसल, बीते दिन विक्रमादित्य सिंह का जन्मदिन था, जिस पर बड़ी संख्या में समर्थकों, शुभचिंतकों और राजनीतिक सहयोगियों ने उन्हें बधाई दी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें “राजा जी” और “टिक्का जी” लिखकर शुभकामनाएं दीं। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पोस्ट में लिखा—


> “बहुत से लोग स्नेह, सम्मान और आत्मीयता से मुझे 'राजा जी' या 'टिक्का जी' कहकर पुकारते हैं। इस स्नेह और अपनापन के लिए मैं आप सभी का हृदय से आभारी हूं। किन्तु समय के साथ जीवन और समाज की सोच भी आगे बढ़ी है। आज के युग में ऐसे संबोधन हमारे गौरवशाली इतिहास का हिस्सा अवश्य हैं, परन्तु वर्तमान में इनकी आवश्यकता नहीं रह गई है। मेरी बस यही विनम्र इच्छा है कि आप सभी मुझे मेरे नाम से पुकारें। यही मेरे लिए सबसे बड़ा स्नेह और सम्मान होगा।”

यह पहली बार नहीं है जब विक्रमादित्य सिंह ने इस तरह की अपील की है। वह पहले भी कई मौकों पर लोगों से अनुरोध कर चुके हैं कि उन्हें केवल उनके नाम से पुकारा जाए। इस बार उन्होंने अपने जन्मदिन के विशेष अवसर पर दोबारा यह बात कही, जो अब सोशल मीडिया पर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त कर रही है।

वर्तमान में विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण से दूसरी बार विधायक हैं और कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण (PWD) तथा शहरी विकास मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। अपने सहज, सादगीपूर्ण और प्रगतिशील विचारों के लिए वे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।


गौरतलब है कि विक्रमादित्य सिंह, हिमाचल प्रदेश के छह बार के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं। वीरभद्र सिंह के निधन के बाद, 10 जुलाई 2021 को रामपुर बुशहर स्थित पद्म पैलेस में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विक्रमादित्य सिंह का राजतिलक किया गया था। यह परंपरा बुशहर रियासत में सदियों से चली आ रही है, जिसमें कहा गया है कि राजगद्दी कभी खाली नहीं छोड़ी जाती।

उसी दिन विक्रमादित्य सिंह को बुशहर रियासत का 123वां राजा घोषित किया गया। यह रियासत ऐतिहासिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण की वंशावली से जुड़ी मानी जाती है।

मगर, विक्रमादित्य सिंह का यह नवीनतम पोस्ट यह दर्शाता है कि वे खुद को आधुनिक भारत का जनसेवक मानते हैं, न कि किसी शाही उपाधि से जुड़ा हुआ व्यक्ति। उनकी यह अपील न केवल सादगी का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि लोकतंत्र में सभी नागरिक समान हैं, चाहे उनका अतीत कितना भी गौरवशाली क्यों न हो।

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