कतर की बड़ी कूटनीतिक जीत: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्धविराम समझौता
दोहा/19/10/2025
दोहा — दक्षिण एशिया में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच कतर ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने कतर और तुर्की की मध्यस्थता में तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताई है। दोहा में हुई पहली औपचारिक शांति वार्ता में दोनों देशों ने सीमा संघर्षों को रोकने और स्थायी शांति बहाल करने का संकल्प लिया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि “इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति वार्ता का एक दौर दोहा में आयोजित किया गया, जिसमें दोनों पक्ष तत्काल युद्धविराम लागू करने और स्थायी शांति के लिए तंत्र स्थापित करने पर सहमत हुए।” कतर ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता और पारस्परिक विश्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब पाकिस्तान के हालिया हवाई हमलों ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में तीन अफगान क्रिकेटरों सहित 17 नागरिकों की जान ले ली थी। ये हमले अरगुन और बरमल जिलों के रिहायशी इलाकों में किए गए थे, जिनसे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।
अफगान प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद ने मलेशियाई प्रधानमंत्री दातो मोहम्मद अनवर इब्राहिम से टेलीफोन वार्ता में कहा कि “संघर्ष की शुरुआत इस्लामाबाद ने की, जिसने अफगान सीमा का उल्लंघन किया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि काबुल किसी संघर्ष की इच्छा नहीं रखता, लेकिन “पाकिस्तानी हमले के बाद जवाब देना मजबूरी बन गया।”
अफगान उप गृह मंत्री मोहम्मद नबी ओमारी ने पाकिस्तान की सैन्य सरकार और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “गाजा शांति सम्मेलन के दौरान शहबाज शरीफ का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशंसा करना शर्मनाक था। हमें इस बात पर शर्म आई कि काश वह मुसलमान न होते।”
ओमारी ने पाकिस्तान के इस दावे को भी सिरे से खारिज किया कि अफगान तालिबान, पाकिस्तानी आतंकवादियों को शरण दे रहा है। उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात ने किसी भी पाकिस्तानी तालिबान को पनाह नहीं दी। वे कबायली इलाकों में मौजूद हैं। पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि वह अपनी आज़ादी के लिए अफगान मुजाहिदीन का ऋणी है, क्योंकि अगर अफगान लड़ाके न होते, तो आज पाकिस्तान भी रूस के कब्जे में होता।”
कतर और तुर्की की मध्यस्थता में दोनों देशों ने न केवल फायरिंग रोकने पर सहमति जताई, बल्कि यह भी तय किया कि आने वाले दिनों में फॉलोअप बैठकें की जाएंगी ताकि युद्धविराम को टिकाऊ बनाया जा सके और सीमा पर स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
कतर के विदेश मंत्रालय ने बयान में आशा जताई कि यह समझौता पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव कम करेगा और पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति की नींव रखेगा। मंत्रालय ने कहा, “कतर इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि दक्षिण एशिया में संवाद और सहयोग के जरिए दीर्घकालिक स्थिरता और सुरक्षा स्थापित की जाए।”
इस समझौते को कतर और तुर्की की एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले कई महीनों से दोनों देश सीमा संघर्षों में उलझे हुए थे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस युद्धविराम से क्षेत्र में शांति की एक नई शुरुआत होगी और दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।