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दुनिया विनाश के रास्ते पर, भारत ही दिखा सकता है नई दिशा : मोहन भागवत

मुंबई/19/10/2025

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मुंबई — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि आज की दुनिया अपने ही बनाए रास्तों पर विनाश की ओर बढ़ रही है और ऐसे समय में केवल भारत ही ऐसा मार्ग दिखा सकता है जो मानवता को संतुलन, शांति और सद्भाव की दिशा में ले जाए। वे रविवार को ‘आर्य युग विषय कोश’ के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे

भागवत ने कहा कि भारत के पूर्वज जब विश्व भ्रमण पर निकले थे, तब वे केवल ज्ञान, संस्कृति और विज्ञान का प्रचार-प्रसार करने गए थे — न उन्होंने किसी पर हमला किया, न किसी का धर्म परिवर्तन कराया। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा से जोड़ने वाला रहा है, तोड़ने वाला नहीं। अब समय आ गया है कि हम फिर से उस भूमिका को निभाएं।”

उन्होंने पश्चिमी देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया के बुद्धिजीवी भारत के प्राचीन ज्ञान, वेदों और ऋषियों की ओर देखने लगे हैं। “पश्चिम के एक लेखक ने लिखा कि दुनिया को अब पूर्व, विशेषकर भारत की ओर देखना चाहिए। उन्होंने पतंजलि और वशिष्ठ का उल्लेख किया। यह हमारे लिए गर्व की बात है, हालांकि दुखद है कि हमें अपनी महानता को पहचानने के लिए किसी पश्चिमी व्यक्ति की राय लेनी पड़ती है,” उन्होंने कहा।

भागवत ने आगे कहा कि भारत पर हुए लगातार आक्रमणों ने न केवल देश को लूटा, बल्कि भारतीयों की सोच और आत्मविश्वास को भी प्रभावित किया। “आखिरी आक्रमणकारियों ने हमारे दिमागों पर हमला किया, जिससे हम अपनी शक्ति और अपनी पहचान भूल गए। अब वक्त है उस आत्मबल को वापस पाने का,” उन्होंने कहा।

आरएसएस प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की प्राचीन परंपरा आध्यात्मिकता और विज्ञान दोनों पर आधारित है। “हमारे पास शास्त्र और अस्त्र दोनों हैं — ज्ञान भी और शक्ति भी। अगर कोई मानवता की राह में बाधा डालता है, तो हमें उसे रोकने की क्षमता भी रखनी चाहिए,” उन्होंने कहा।

भागवत के इस वक्तव्य को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण की पुकार के रूप में देखा जा रहा है, जो दुनिया को एक नए मार्ग — “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना — की ओर ले जाने का संदेश देता है।

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