दलाई लामा बोले — मेरा जीवन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित, कहा: संवाद ही वास्तविक साधना है, अनुष्ठान नहीं
धर्मशाला/19/10/2025
धर्मशाला। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि उनका जीवन पूरी तरह से दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि अगर लोग समय-समय पर आपसी संवाद करें तो यह वास्तव में अद्भुत होगा, क्योंकि बौद्ध दृष्टिकोण से देखा जाए तो अनुष्ठान करने से अधिक संवाद और चिंतनशील विचार-विमर्श उपयोगी है।
रविवार को धर्मशाला में आयोजित 29वें माइंड एंड लाइफ संवाद के दौरान दलाई लामा ने ये विचार माइंड एंड लाइफ इंस्टीट्यूट और माइंड एंड लाइफ यूरोप के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान रखे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जब वे ल्हासा में थे, तब उन्होंने दार्शनिक परंपराओं का गहन अध्ययन किया और वाद-विवाद एवं आलोचनात्मक चिंतन की प्रक्रिया से सीखा।
धर्मगुरु ने कहा कि वैज्ञानिकों को बौद्ध परंपरा में निहित तर्क, ज्ञानमीमांसा और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि, “मैं हर सुबह बोधिचित्त की साधना करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि जो लोग मुझ पर भरोसा करते हैं, वे सभी कुशल और प्रसन्न रहें। मेरा जीवन पूरी तरह से दूसरों की भलाई के लिए समर्पित है।”
दलाई लामा ने आगे कहा कि हालांकि वे एक साधु वेशधारी धार्मिक व्यक्ति हैं, लेकिन जब भी कोई व्याख्यान देते हैं तो अक्सर विज्ञान का सहारा लेते हैं। उनका कहना है कि बौद्ध चिंतन की आलोचनात्मक प्रक्रिया और वैज्ञानिक अन्वेषण दोनों में गहरी समानता है।
उन्होंने बताया कि जैसे ही हम अपनी मां से जन्म लेते हैं, हमारा अनुभव शुरू हो जाता है। हमारी भावनाएं चेतना में निहित होती हैं, इसलिए यह समझना बेहद आवश्यक है कि मन कैसे काम करता है, क्योंकि संपूर्ण जीवन उसी पर आधारित है।
इस अवसर पर आयोजित 29वें माइंड एंड लाइफ संवाद में 120 से अधिक वैज्ञानिक, विद्वान, चिंतनशील साधक, व्यापारिक नेता और नीति निर्माता शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों ने मन की प्रकृति, चेतना, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का आयोजन माइंड एंड लाइफ इंस्टीट्यूट, माइंड एंड लाइफ यूरोप और दलाई लामा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें तिब्बती शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के अतिथि भी शामिल हुए।