NEWS CHOICE

निष्पक्ष खबर, बेबाक अंदाज

गरीबों के घर में खुशियां बांटता ‘कपड़ा बैंक’: सिपाही महेश भावरकर का मानवीय अभियान बना लोगों की दिवाली का सहारा

छिंदवाड़ा/20/10/2025

chidwada

छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश): जब दीपावली का त्योहार देशभर में रोशनी, मिठास और खुशियों से मनाया जा रहा है, वहीं मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में एक पुलिस सिपाही ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने सैकड़ों गरीब परिवारों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है। यह कहानी है सिपाही महेश भावरकर की, जिन्होंने सालों पहले “कपड़ा बैंक” की शुरुआत की थी — एक ऐसा अभियान जो आज जरूरतमंदों के घरों में उम्मीद और खुशियां दोनों पहुंचा रहा है।

महेश भावरकर का यह अभियान इस सोच पर आधारित है कि “हर किसी के घर में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो उनके काम का नहीं, पर किसी और के लिए अनमोल हो सकता है।” इसी विचार से उन्होंने पुराने कपड़ों, जूतों, खिलौनों और अन्य उपयोगी वस्तुओं को इकट्ठा करने की पहल शुरू की। जो लोग अपने पुराने सामान को देना चाहते हैं, वे कपड़ा बैंक से जुड़ जाते हैं। बाद में इन्हें धोकर, मरम्मत कर और पैक करके जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जाता है।

इस दीपावली, कपड़ा बैंक के स्वयंसेवक गांव-गांव घूमकर उन परिवारों तक पहुंचे जिनकी दिवाली आर्थिक तंगी के कारण फीकी पड़ रही थी। उन्होंने बच्चों को कपड़े और खिलौने, महिलाओं को साड़ियां और पुरुषों को गर्म कपड़े दिए। इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर पटाखे और मिठाई भी बांटी गई, ताकि कोई बच्चा इस त्योहार पर मायूस न रहे।

महेश भावरकर बताते हैं, “हमारा मकसद सिर्फ कपड़े बांटना नहीं, बल्कि खुशियां बांटना है। जिन लोगों के पास देने को कुछ है, वे अगर थोड़ा योगदान करें, तो किसी की ज़िंदगी में उजाला फैल सकता है।”

इस अभियान की खासियत यह है कि इसमें न किसी सरकारी फंड की जरूरत पड़ी, न किसी बड़ी संस्था के सहयोग की — सिर्फ इंसानियत की भावना और कुछ नेकदिल लोगों की भागीदारी से यह कारवां चलता रहा। आज “कपड़ा बैंक” न केवल छिंदवाड़ा में, बल्कि आसपास के जिलों में भी गरीबों की मदद का पर्याय बन चुका है।

जिन परिवारों तक यह सहायता पहुंची, उनके चेहरों पर चमक इस बात की गवाही दे रही थी कि दिवाली सिर्फ अमीरों की नहीं, हर उस दिल की है जो बांटने का हौसला रखता है।

महेश भावरकर और उनका “कपड़ा बैंक” इस बात का प्रमाण है कि छोटी-सी पहल भी बड़ी रोशनी फैला सकती है — क्योंकि जब दिल से दी जाती है खुशी, तो हर घर में दीप जल उठते हैं।

Scroll to Top