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हिमाचल में पंचायत चुनाव पर संकट: हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद DC ने नहीं लगाया आरक्षण रोस्टर, सरकार की तैयारी पर सवाल

शिमला/21/10/2025

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शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राज्य के सभी जिलों के उपायुक्त (DC) हाईकोर्ट और पंचायतीराज विभाग दोनों के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे आगामी चुनावों पर संकट गहराता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि 25 सितंबर तक अनिवार्य रूप से लागू किया जाने वाला आरक्षण रोस्टर अब तक किसी भी जिले में नहीं लगाया गया है।

हाईकोर्ट ने 2020 में दिए थे सख्त निर्देश

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनीष धर्मेक बनाम स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश मामले में वर्ष 2020 में स्पष्ट आदेश दिए थे कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों से कम से कम 90 दिन पहले आरक्षण रोस्टर जारी किया जाए। अदालत का उद्देश्य यह था कि यदि किसी नागरिक को आरक्षण सूची पर आपत्ति हो, तो उसे कानूनी रूप से अपील का पूरा अवसर मिल सके और न्यायपालिका को भी मामले के निपटारे का समय मिले।

अदालत ने यह भी कहा था कि यदि आरक्षण रोस्टर देर से जारी किया गया और उसी दौरान इलेक्शन कमीशन ने चुनाव की अधिसूचना घोषित कर दी, तो किसी व्यक्ति का अपील करने का अधिकार समाप्त हो जाएगा या फिर इससे चुनाव प्रक्रिया में विलंब होगा।

सचिवालय ने भी दिया था आदेश, फिर भी लापरवाही

15 सितंबर को पंचायतीराज विभाग के सचिव ने सभी जिलों के DC को आदेश भेजकर कहा था कि प्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए आरक्षण रोस्टर 25 सितंबर तक अनिवार्य रूप से लगाया जाए।

इसके बावजूद 28 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई जिला प्रशासन इस दिशा में आगे नहीं बढ़ पाया है। इससे सरकार की चुनावी तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।

बीजेपी का कांग्रेस पर हमला — “हार के डर से टाल रही चुनाव”


आरक्षण रोस्टर को लेकर हो रही देरी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा का कहना है कि सरकार को चुनाव में हार का डर सता रहा है, इसलिए जानबूझकर प्रक्रिया को धीमा किया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यदि समय पर आरक्षण सूची जारी नहीं हुई, तो चुनाव टल सकते हैं और यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।

सरकार के वादे कमजोर साबित

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर होंगे। लेकिन अब तक आरक्षण रोस्टर तैयार न होना उनके बयानों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर रहा है। इस स्थिति ने राज्य में चुनावों के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा कर दी है।

दिसंबर में होने हैं चुनाव, जनवरी में बर्फबारी बन सकती है बाधा


हिमाचल प्रदेश में कुल 3577 पंचायतें हैं और इन्हीं में दिसंबर 2025 में पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं। मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल 23 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है। संवैधानिक दृष्टि से स्टेट इलेक्शन कमीशन को जनवरी से पहले हर हाल में चुनाव संपन्न कराने हैं। कमीशन दिसंबर में वोटिंग करवाने के पक्ष में है, क्योंकि जनवरी में शिमला, किन्नौर, कुल्लू, मंडी, लाहौल-स्पीति और सिरमौर जैसे जिलों में भारी बर्फबारी होती है, जिससे चुनाव कराना मुश्किल हो जाता है।

संवैधानिक प्रक्रिया पर मंडरा रहा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द आरक्षण रोस्टर जारी नहीं किया गया, तो इलेक्शन शेड्यूल प्रभावित हो सकता है और राज्य में संवैधानिक बाध्यता का उल्लंघन हो जाएगा। यह निचले स्तर की लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी और प्रशासनिक सुस्ती ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या सरकार समय रहते स्थिति को संभाल पाती है या हिमाचल में पंचायत चुनाव एक और विवाद का विषय बन जाएंगे।

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