भारत की न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल: नीरव मोदी केस में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने दी पैरवी, प्रत्यर्पण पर फिर से अटका मामला
पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की कोशिशों में एक और बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दीपक वर्मा ने लंदन की अदालत में नीरव मोदी के पक्ष में विशेषज्ञ राय (Expert Opinion) दी है, जिसमें उन्होंने भारत की जेलों की स्थिति और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उनकी इस राय के आधार पर ब्रिटेन में नीरव मोदी की ओर से प्रत्यर्पण आदेश को चुनौती देने वाली नई याचिका दाखिल की गई है।
ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अगस्त 2025 में नीरव मोदी की इस याचिका को स्वीकार कर लिया था, जिसकी सुनवाई 23 नवंबर को होनी है। इस याचिका में नीरव मोदी ने दावा किया है कि भारत लौटने पर उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी और उसे कई जांच एजेंसियों की पूछताछ और दबाव का सामना करना पड़ेगा।
जस्टिस दीपक वर्मा, जो सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं, ने अपने बयान में कहा है कि भारत की जेलों की स्थिति मानवीय मानकों के अनुरूप नहीं है और वहां आरोपी के साथ “न्यायसंगत व्यवहार” की गारंटी नहीं दी जा सकती। यह राय नीरव मोदी की प्रत्यर्पण प्रक्रिया में बाधा डाल सकती है।
दरअसल, नीरव मोदी फिलहाल लंदन की वांड्सवर्थ जेल में बंद है, जहां वह 19 मार्च 2019 से हिरासत में है। उसे ब्रिटिश पुलिस स्कॉटलैंड यार्ड ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर गिरफ्तार किया था। अब यह मामला ब्रिटेन में उसकी अंतिम कानूनी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसके बाद उसके पास कोई और कानूनी रास्ता नहीं बचेगा।
यह पहली बार नहीं है जब नीरव मोदी ने पूर्व भारतीय जज की मदद ली हो। इससे पहले, उसने जस्टिस (रिटायर्ड) मार्कंडेय काटजू की राय अदालत में पेश की थी, जिसे कोर्ट ने “निष्पक्ष नहीं” बताते हुए खारिज कर दिया था। जज सैम गुज ने 2021 में कहा था कि काटजू की राय उनके व्यक्तिगत मतभेदों से प्रभावित लगती है।
भारत सरकार ने इस बार भी प्रत्यर्पण को रुकने से बचाने के लिए ब्रिटेन को पत्र भेजा है और यह आश्वासन दिया है कि नीरव मोदी को भारत लाए जाने पर केवल मुकदमे का सामना करना पड़ेगा, किसी अन्य एजेंसी द्वारा पूछताछ या हिरासत नहीं होगी। भारतीय अधिकारी ने कहा कि सरकार अदालत में जस्टिस वर्मा की राय का “कड़ा विरोध” करेगी, क्योंकि यह भारत की न्याय प्रणाली की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
बता दें कि नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के साथ 6,498 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इस पूरे घोटाले की रकम करीब 13,578 करोड़ रुपये है, जिसमें उसके रिश्तेदार मेहुल चोकसी से जुड़े 7,000 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। ईडी (ED) ने अब तक 2,598 करोड़ की संपत्ति जब्त की है, जिनमें से 981 करोड़ रुपये बैंक को लौटाए जा चुके हैं। वहीं ब्रिटेन में 130 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया जारी है।
इस ताजा घटनाक्रम से साफ है कि नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण की राह एक बार फिर मुश्किल हो गई है — और अब सबकी निगाहें 23 नवंबर को होने वाली ब्रिटेन की अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं।