21 साल पुराना फर्जी एनकाउंटर केस: पूर्व SSP ज्योति बेलूर पर CBI की पकड़ अब तक नहीं, लंदन में रह रहीं आरोपी अफसर
गाजियाबाद/25/10/2025
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के भोजपुर चौराहे पर 21 साल पहले हुए चर्चित फर्जी एनकाउंटर मामले में एक बार फिर सुनवाई ने रफ्तार पकड़ी है। शुक्रवार को विशेष सीबीआई कोर्ट में केस की सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच अधिकारी (IO) को तलब किया और मामले की अगली तारीख 21 नवंबर तय की। यह वही मामला है, जिसमें तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) ज्योति बेलूर पर आरोप है कि उनकी सरकारी रिवॉल्वर से भी गोलियां चली थीं — और इस कथित मुठभेड़ में चार निर्दोष युवकों की जान गई थी।
1996 का भोजपुर एनकाउंटर — “वीरता” दिखाने के नाम पर चार मौतें
8 नवंबर 1996 को भोजपुर थाना क्षेत्र के मछरिया गांव की पुलिया के पास पुलिस ने दावा किया था कि उसने चार “अपराधियों” को मुठभेड़ में मार गिराया। मारे गए युवकों की पहचान मोदीनगर के रहने वाले प्रवेश, जसवीर, जलालुद्दीन और अशोक के रूप में हुई। उस वक्त मौके पर तत्कालीन एएसपी ज्योति बेलूर भी पहुंचीं। लेकिन जब जांच शुरू हुई तो हकीकत कुछ और निकली — CBI ने अपनी रिपोर्ट में इस एनकाउंटर को फर्जी बताया, और इसे पुलिस की ओर से “वीरता पदक और प्रमोशन” हासिल करने के लिए की गई एक साजिश करार दिया।
CBI ने ज्योति बेलूर को बनाया आरोपी
CBI ने अपनी जांच में कहा कि गोलीबारी में ज्योति बेलूर की सरकारी रिवॉल्वर से भी फायर किया गया था। इस आरोप के बाद बेलूर पर हत्या और षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप लगे। इसके बाद से यह मामला अदालत में लंबित है।
विदेश भागीं अफसर — वारंट और कुर्की के बाद भी गिरफ्त से दूर
मामले के खुलासे के बाद ज्योति बेलूर भारत छोड़कर इंग्लैंड चली गईं। सीबीआई ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और कुर्की आदेश जारी किए, लेकिन अब तक उन्हें भारत लाने में नाकाम रही है। बताया जाता है कि वह पिछले दो दशक से लंदन में रह रही हैं।
अब क्या कर रही हैं ज्योति बेलूर?
साल 2017 में सेवा से बर्खास्त की जा चुकीं ज्योति बेलूर फिलहाल लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज (UCL) में “सुरक्षा और अपराध विज्ञान विभाग” से बतौर शिक्षण स्टाफ सदस्य जुड़ी हुई हैं। CBI की रिपोर्ट के मुताबिक, वह अविभाजित उत्तर प्रदेश कैडर की 1993 बैच की IPS अधिकारी थीं और मोदीनगर में यह उनकी पहली पोस्टिंग थी।
21 नवंबर को अगली सुनवाई
विशेष CBI कोर्ट ने इस केस में जांच अधिकारी को तलब किया है ताकि आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सके। अब 21 नवंबर को अगली सुनवाई होगी, जिसमें कोर्ट यह तय कर सकता है कि फरार ज्योति बेलूर के खिलाफ अगला कानूनी कदम क्या होगा।
यह मामला आज भी भारतीय पुलिस इतिहास के उन काले अध्यायों में गिना जाता है, जहां “एनकाउंटर” के नाम पर चार निर्दोषों की जान गई और न्याय के इंतजार में दो दशक बीत गए।