बघाट बैंक लोन घोटाला: 3.50 करोड़ की देनदारी में कंडाघाट से रविंदर नाथ गिरफ्तार, अदालत में दी रकम लौटाने की हामी
सोलन/26/10/2025
सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में बघाट बैंक की करोड़ों रुपये की लोन रिकवरी कार्रवाई में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बैंक के एक और डिफाल्टर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी रविंदर नाथ, जिस पर लगभग 3.50 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी थी, को पुलिस ने कंडाघाट क्षेत्र से गिरफ्तार किया। बाद में उसे सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं सोलन की अदालत में पेश किया गया।
आरोपी ने अदालत में दिया 1 लाख का चेक, संपत्तियां बेचने का वादा
अदालत में पेशी के दौरान रविंदर नाथ ने 1 लाख रुपये का चेक जमा करवाया और शेष राशि संपत्तियां बेचकर चुकाने का आश्वासन दिया। अदालत ने फिलहाल गिरफ्तारी वारंट को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि आरोपी ने वादा पूरा नहीं किया तो कार्रवाई दोबारा शुरू होगी।
2013 से नहीं चुकाया गया लोन, ब्याज सहित बढ़ी देनदारी
एसपी सोलन गौरव सिंह ने बताया कि आरोपी ने वर्ष 2013 में व्यापारिक उद्देश्य से बघाट बैंक से लोन लिया था, लेकिन तय समय में इसे चुकाया नहीं गया। इसके बाद बैंक ने उसे डिफाल्टर घोषित कर दिया। वर्षों की देरी के चलते आज उसकी कुल देनदारी 3,49,26,957 रुपये तक पहुंच गई है। कई बार नोटिस जारी होने के बावजूद आरोपी अदालत में पेश नहीं हो रहा था, जिसके चलते पुलिस ने शनिवार को कार्रवाई की।
बैंक की लापरवाही से बढ़ी बकाया राशि
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि बैंक की ओर से भी कई वर्षों तक रिकवरी प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई। 2013 से अब तक बैंक ने न तो कठोर कदम उठाए और न ही ऋण वसूली के लिए कोई ठोस पहल की। इस सुस्ती के कारण बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और लोन राशि ब्याज सहित लगातार बढ़ती रही।
दर्जनों डिफाल्टरों पर कार्रवाई की तैयारी
सहायक पंजीयक गिरीश नड्डा ने बताया कि अब तक 35 डिफाल्टरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं, जबकि शनिवार को ही 13 नए डिफाल्टरों पर वारंट जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि करीब 200 केस अभी अदालत में लंबित हैं, जिनमें आने वाले दिनों में एक के बाद एक सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस और बैंक की संयुक्त निगरानी
पुलिस प्रशासन और सहकारी विभाग ने बघाट बैंक के पुराने लोन मामलों की अब संयुक्त निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आगे से किसी भी डिफाल्टर को राहत नहीं दी जाएगी और सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त रिकवरी की जाएगी।