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हिमाचल का रहस्यमयी काओ गांव: जहां देवी की मौजूदगी और परंपराएं आज भी जीवित हैं

मंडी/26/10/2025

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मंडी जिले की पर्वतीय वादियों में बसा काओ गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ मां कामाक्षा मंदिर की दिव्यता और रहस्यमयी परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। करसोग उपमंडल से मात्र 6 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर शक्ति की देवी सती को समर्पित है और अपनी अद्भुत स्थापत्य कला से देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

डाॅ. हिमेंद्र बाली हिम के अनुसार, यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि तंत्र साधना का सर्वोच्च पीठ भी माना जाता है। मान्यता है कि सतयुग से यह स्थान तांत्रिक सिद्धियों का केंद्र रहा है। यहां स्थित देवी की महामुद्रा के दर्शन आज तक किसी ने नहीं किए। छोटे छेद ‘मोरी’ से भक्त धूप अर्पित करते हैं और सती प्रथा काल में महिलाएं इसी मार्ग से देवी महाकाली के दर्शन करती थीं।

काओ गांव की एक अनूठी परंपरा यह है कि लोग बिस्तर पर नहीं सोते, क्योंकि उनका विश्वास है कि ऐसा करने से देवी का श्राप पड़ सकता है। केवल मंदिर में देवी के शयनकक्ष में बिस्तर सजाया जाता है, और सुबह बिस्तर पर पड़ी सलवटें इस बात का संकेत मानी जाती हैं कि देवी ने वहां विश्राम किया।

सांस्कृतिक मर्मज्ञ डाॅ. जगदीश शर्मा के अनुसार, इस सिद्ध स्थल की स्थापना स्वयं भगवान परशुराम ने की थी। मंदिर के गुफानुमा कक्ष में आज भी परशुराम की ऊंची मूर्ति स्थापित है और यह काओ, ममेल, नगर, निरथ और निरमंड में से एक प्रमुख पीठ है।

काओ गांव का सांस्कृतिक जीवन आठी का मेला और रात्रिफेर उत्सव से भी जुड़ा है। इन उत्सवों में मशालों की रोशनी, नगाड़ों की ध्वनि और जोगन पीढ़ा द्वारा किए जाने वाले दिग्बंधन नृत्य भक्तों में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।

मां कामाक्षा को सुकेत रियासत के सेन वंशज शासकों की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि देवी की सच्ची भक्ति करने से जीवन में शांति और समृद्धि मिलती है। काओ गांव का मां कामाक्षा मंदिर हिमाचल की प्राचीन शक्ति उपासना और लोक-आस्था का जीवंत प्रतीक है, जहां देवी की मौजूदगी आज भी महसूस की जा सकती है।

यह स्थान न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि हिमाचल की संस्कृति, इतिहास और लोक-विश्वास का भी एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

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