हरियाणा के जस्टिस सूर्यकांत बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के 53वें चीफ जस्टिस, CJI बीआर गवई ने की सिफारिश
नई दिल्ली/27/10/2025
नई दिल्ली। देश की न्यायपालिका में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई (CJI बीआर गवई) ने सोमवार को वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को अपना उत्तराधिकारी बनाए जाने की सिफारिश केंद्र सरकार से की है। इस सिफारिश के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, उनका नाम मंजूरी के लिए कानून मंत्रालय को भेजा गया है।
CJI गवई का कार्यकाल 23 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को देश के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। उनका कार्यकाल लगभग 14 महीनों का होगा, जो 9 फरवरी 2027 तक रहेगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।
हरियाणा से पहले CJI बनेंगे सूर्यकांत — गांव से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ गांव में हुआ था। उन्होंने 1981 में हिसार के स्टेट पीजी कॉलेज से ग्रेजुएशन और 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से लॉ की डिग्री हासिल की।
कानूनी करियर की शुरुआत उन्होंने 1984 में हिसार की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से की और 1985 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।
उनकी मेहनत और कानूनी समझ के चलते मार्च 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट नामित किया गया। 9 जनवरी 2004 को वे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने। इसके बाद 24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।
जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा से आने वाले पहले व्यक्ति होंगे जो भारत के मुख्य न्यायाधीश पद तक पहुंचेंगे। CJI बीआर गवई ने अपने पत्र में लिखा कि जस्टिस सूर्यकांत न्यायपालिका की गरिमा और संविधान की मूल भावना को बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम हैं।
सादगी से भरा बचपन, संघर्षों से तराशा व्यक्तित्व
सुप्रीम कोर्ट की ऊंचाइयों तक पहुंचने वाले जस्टिस सूर्यकांत का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे और आठवीं तक उन्होंने गांव के स्कूल में फर्श पर बैठकर पढ़ाई की।
खाली समय में वे खेतों में परिवार की मदद करते थे। उन्होंने पहली बार शहर तब देखा जब वे दसवीं की परीक्षा देने हिसार के नजदीकी कस्बे हांसी पहुंचे थे।
महत्वपूर्ण फैसलों से गूंजा नाम
जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई है—
अनुच्छेद 370 निरस्तीकरण पर 2023 के फैसले को बरकरार रखने वाली बेंच का हिस्सा रहे।
राजद्रोह कानून (Sedition Law) को अस्थायी रूप से निलंबित रखने और इसकी समीक्षा तक नई FIR न दर्ज करने के आदेश दिए।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
2017 में डेरा सच्चा सौदा हिंसा के बाद की कार्रवाई में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच का हिस्सा रहे, जिसने डेरा की अवैध संपत्तियों को खाली कराने का आदेश दिया।
पेगासस स्पाइवेयर मामले में निगरानी की जांच के लिए साइबर एक्सपर्ट पैनल गठित करने वाली बेंच का हिस्सा रहे। उन्होंने कहा था— “राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर असीमित छूट नहीं दी जा सकती।”
बिहार SIR मामले में उन्होंने पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया था।
न्यायपालिका में नया दौर
जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने से न केवल हरियाणा बल्कि देश की न्याय प्रणाली में नई ऊर्जा और प्रतिनिधित्व का संचार होगा। वे संवैधानिक मूल्यों के प्रबल समर्थक माने जाते हैं और न्यायपालिका में मानवाधिकार, समानता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देते रहे हैं।