अमेरिका पहुंचने में लगे 7 महीने, अब खाली हाथ लौटा रजत: करनाल के हलवाई पिता ने बेचे प्लॉट-दुकान, 60 लाख खर्च कर बेटे को भेजा था विदेश
करनाल/27/10/2025
करनाल।
अमेरिका में बेहतर भविष्य की तलाश में निकले हरियाणा के करनाल जिले के 16 युवाओं के सपने उस वक्त चकनाचूर हो गए जब उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट कर भारत वापस भेज दिया गया। इन 50 भारतीयों में करनाल के सगोही गांव का रहने वाला रजत भी शामिल है, जिसके परिवार ने बेटे को विदेश भेजने के लिए 60 लाख रुपये खर्च कर दिए थे। पिता ने हलवाई की दुकान और प्लॉट तक बेच डाला, लेकिन सात महीने की जोखिम भरी यात्रा और तमाम मुश्किलों के बाद भी रजत का अमेरिकी सपना अधूरा रह गया।
सात महीने का संघर्ष, जंगलों से होकर पहुंचा अमेरिका
रजत ने बताया कि वह 26 मई 2023 को अमेरिका के लिए निकला था। उसका उद्देश्य अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना था। एजेंट ने भरोसा दिलाया था कि उसे फ्लाइट से अमेरिका भेजा जाएगा, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग थी।
वह करीब 12-13 युवकों के समूह के साथ पनामा के घने जंगलों, नदियों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुज़रा। इस दौरान उन्होंने कई खतरनाक परिस्थितियों का सामना किया — कई दिनों तक भोजन और पानी की कमी रही, कई जगह उन्हें ठहरने की अनुमति नहीं मिली, और कई बार उन्हें पैदल ही लंबी दूरी तय करनी पड़ी।
रजत ने बताया कि यात्रा में करीब 45 लाख रुपये एजेंट को और बाकी रकम अन्य खर्चों में चली गई। उसने कहा कि वह 2 दिसंबर को मैक्सिको बॉर्डर पार कर चुका था, जिसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने उसे 12-13 दिन तक हिरासत में रखा।
अमेरिका पहुंचकर भी नहीं मिला ठिकाना, लौटना पड़ा घर
रजत ने बताया कि 20 अक्टूबर को उसे जानकारी दी गई कि उसका केस रिजेक्ट हो गया है और उसे भारत वापस भेजा जाएगा। उसने कहा कि किसी ने उसके साथ गलत व्यवहार नहीं किया, लेकिन पूरी यात्रा और प्रक्रिया ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया।
रविवार देर शाम जब रजत अपने गांव लौटा तो ग्रामीणों ने उसका दर्द भरी आंखों से स्वागत किया। अब वह अपने पिता की हलवाई की दुकान पर हाथ बटाने का मन बना चुका है।
भाई विशाल बोले – “हमने सब कुछ बेच दिया, पर सपना अधूरा रह गया”
रजत के बड़े भाई विशाल ने बताया कि परिवार ने उसके लिए मकान, दुकान और प्लॉट तक बेच दिए। उनका कहना था कि भाई अमेरिका में जाकर कुछ बड़ा करेगा और परिवार की स्थिति सुधरेगी, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया।
विशाल ने बताया कि उन्होंने एजेंट को 45 लाख रुपये दिए थे और बाकी रकम कानूनी अपील, यात्रा और अन्य खर्चों में चली गई। अब वे एजेंट से बात करेंगे, और अगर उसने समाधान नहीं दिया तो कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
युवाओं को चेतावनी — “गलत रास्ता न अपनाएं”
विशाल ने युवाओं से अपील की कि वे विदेश जाने के लिए अवैध रास्तों का सहारा न लें। उन्होंने कहा —
“हमने जो भुगता, कोई और परिवार न भुगते। अगर विदेश जाना है तो सही और कानूनी तरीके से जाएं, नहीं तो जिंदगी का सबसे बड़ा पछतावा हाथ लगेगा।”
करनाल के 16 युवाओं का टूटा सपना
अमेरिका से डिपोर्ट किए गए 50 भारतीयों में से 16 युवक करनाल जिले के हैं। सभी ने लाखों रुपये खर्च करके एजेंटों के जरिए यह खतरनाक सफर तय किया, लेकिन किसी का भी केस सफल नहीं हो पाया।
अब गांवों में लौटे ये युवक अमेरिका की यादों से ज्यादा उस टूटे सपने की चोट महसूस कर रहे हैं, जिसने न केवल उनका भविष्य बल्कि उनके परिवारों की जमा पूंजी भी निगल ली।
करनाल के रजत की कहानी आज सैकड़ों उन युवाओं के लिए सबक है जो अवैध रास्तों से विदेश जाने के लालच में अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। अमेरिकी सपना पूरा करने के चक्कर में कई घरों की खुशियां उजड़ गईं। अब रजत का एक ही संकल्प है —
अब पिता की दुकान संभालूंगा, और किसी और को इस रास्ते पर नहीं जाने दूंगा।”