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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राफेल जेट में भरेंगी उड़ान, अंबाला एयरबेस बनेगा ऐतिहासिक पल का साक्षी

नई दिल्ली/28/10/2025

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 29 अक्टूबर को हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से देश के सबसे उन्नत लड़ाकू विमान राफेल (Rafale) में उड़ान भरेंगी। यह उड़ान भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ेगी, क्योंकि यह पहली बार होगा जब देश की महिला राष्ट्रपति राफेल जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट में उड़ान भरेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मू इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरबेस पर सुखोई-30 MKI में उड़ान भर चुकी हैं। अब दो साल बाद वह फिर एक बार भारतीय वायुसेना की ताकत और तकनीकी क्षमता को करीब से महसूस करेंगी। राफेल में उनकी यह उड़ान न केवल भारत की रक्षा शक्ति का प्रतीक होगी, बल्कि महिलाओं के लिए सशक्तिकरण और साहस की नई मिसाल भी बनेगी।

अंबाला एयरबेस पर तैयारियां पूरी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम


अंबाला एयरबेस, जो भारतीय वायुसेना के सबसे रणनीतिक ठिकानों में से एक है, इस मौके के लिए पूरी तरह तैयार है। तकनीकी विशेषज्ञों और पायलटों ने राफेल की सभी प्री-फ्लाइट जांचें पूरी कर ली हैं। एयरबेस को विशेष रूप से सजाया गया है और सुरक्षा के लिए तीन-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई है। राष्ट्रपति के दौरे के दौरान वायुसेना प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी और अनुभवी पायलट मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू वायुसेना के जवानों से भी संवाद करेंगी और उनके प्रशिक्षण व तकनीकी तैयारी की जानकारी लेंगी।

राफेल: भारत की आसमान में गर्व की ताकत

राफेल फाइटर जेट फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी द्वारा निर्मित है और 2020 में भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हुआ। यह मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्र पर भी सटीक वार करने में सक्षम है। राफेल को “गेम चेंजर” कहा जाता है क्योंकि इसमें आधुनिक रडार सिस्टम, मिसाइल जामिंग तकनीक और लंबी दूरी तक दुश्मन को निशाना बनाने की क्षमता है। यह विमान ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।

राष्ट्रपति की उड़ान बनेगी प्रेरणा

राष्ट्रपति मुर्मू का यह कदम न केवल भारतीय वायुसेना के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा, बल्कि महिलाओं के लिए साहस, नेतृत्व और बराबरी की उड़ान का प्रतीक भी बनेगा। राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, यह उड़ान वायुसेना की नई तकनीकी क्षमताओं को समझने और आधुनिक लड़ाकू विमानों की कार्यप्रणाली को करीब से देखने के उद्देश्य से की जा रही है। 2023 में सुखोई उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने कहा था, “फाइटर जेट में उड़ान भरना केवल रोमांच नहीं, यह भारत की तकनीकी और सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।” अब राफेल में उनकी उड़ान उस आत्मविश्वास को और ऊंचाई देगी।

देश के लिए गौरव का क्षण

अंबाला एयरबेस पर होने वाला यह ऐतिहासिक क्षण भारतीय वायुसेना के लिए गर्व और देश के नागरिकों के लिए सम्मान का विषय होगा। भारत की पहली महिला राष्ट्रपति का राफेल उड़ाना यह संदेश देगा कि अब आसमान भी सीमित नहीं— यह भारत की महिलाओं के साहस की नई सीमा है।

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