संजौली मस्जिद प्रकरण में बड़ा फैसला: जिला अदालत ने वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज की, नगर निगम सभी मंजिलें गिराने को तैयार
शिमला/30/10/2025
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संजौली मस्जिद से जुड़े विवाद पर जिला अदालत ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मस्जिद के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि इमारत का निर्माण नियमों के विपरीत किया गया था, इसलिए ध्वस्तीकरण का आदेश वैध है।
फैसले के बाद अब शिमला नगर निगम को मस्जिद की सभी पाँच मंज़िलों को गिराने की पूरी अनुमति मिल गई है। इससे पहले नगर निगम आयुक्त की कोर्ट ने केवल निचली दो मंजिलों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में पूरी इमारत को अवैध घोषित कर दिया गया था।
मामला क्या है?
संजौली क्षेत्र में स्थित इस मस्जिद पर अवैध निर्माण को लेकर साल 2010 से मामला चल रहा था। नगर निगम की आयुक्त कोर्ट में इस दौरान 45 से अधिक सुनवाई हुईं। पहले चरण में ऊपरी मंज़िलें गिराने का आदेश दिया गया था, जबकि मई 2025 में निगम अदालत ने पूरी इमारत को अवैध घोषित कर दिया।
वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने इस आदेश के खिलाफ जिला अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था, लेकिन अब जिला अदालत ने भी उनका दावा खारिज कर दिया है।
वक्फ बोर्ड का दावा और अदालत का दृष्टिकोण
हिमाचल वक्फ बोर्ड ने दावा किया था कि मस्जिद की जमीन उनके स्वामित्व में है, लेकिन अदालत ने कहा कि प्रस्तुत दस्तावेज़ स्वामित्व सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए इमारत को पूर्णतः अवैध निर्माण माना गया है।
फैसला आते ही माहौल
जिला अदालत का फैसला आते ही कोर्ट परिसर में उपस्थित कुछ संगठनों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर प्रतिक्रिया दी। यह फैसला चर्चा में बना हुआ है।
संजौली मस्जिद कमेटी ने संकेत दिया है कि वे अब इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगी।
मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद लतीफ ने कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
सितंबर 2024 में एक विवाद के बाद इस मामले ने और जोर पकड़ा। इसके बाद शहर में विरोध प्रदर्शन हुए, और तभी से मस्जिद पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई थी।