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हिमाचल में बड़े पैमाने पर फर्जी होम स्टे का खुलासा: 454 होटल होम स्टे लाइसेंस पर चल रहे, कार्रवाई के निर्देश

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हिमाचल प्रदेश में होम स्टे की आड़ में चल रहे फर्जी होटलों का बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पूरे पर्यटन विभाग को सकते में डाल दिया है। राज्य में 454 ऐसे होटल चिन्हित किए गए हैं जो केवल नाम के लिए होम स्टे के रूप में पंजीकृत हैं, लेकिन असल में पूर्ण रूप से व्यावसायिक होटल की तरह संचालित हो रहे हैं। पर्यटन विभाग की बायोडीजी सूची में इनका नाम तो होम स्टे के रूप में दर्ज है, लेकिन इनका संचालन होटल की तर्ज पर किया जा रहा है, जिससे होम स्टे की मूल भावना और नियमों की खुलकर अनदेखी हो रही है। कई स्थानों पर ऐसे फर्जी होम स्टे 20-20 कमरों के साथ संचालित हो रहे हैं, जबकि सरकार की गाइडलाइन के अनुसार एक मान्यता प्राप्त होम स्टे में अधिकतम छह कमरों की अनुमति ही दी जाती है। शिमला, कुल्लू, मनाली, धर्मशाला, कसौली, और भुंतर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर यह अवैध धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। होम स्टे एसोसिएशन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन सचिव से शिकायत की है और सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि असली होम स्टे संचालकों को नुकसान से बचाया जा सके और राज्य को हो रहे राजस्व नुकसान पर भी लगाम लगाई जा सके। होम स्टे एसोसिएशन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े होटल मालिकों ने सरकारी नियमों को दरकिनार करते हुए होम स्टे के नाम पर पंजीकरण करवा लिया है, ताकि उन्हें होटल लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया, टैक्स और अन्य कानूनी दायित्वों से बचाव मिल सके। ऐसे फर्जी पंजीकरण से न सिर्फ पर्यटन क्षेत्र में असमानता पैदा हो रही है, बल्कि सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि सरकार “सिल्वर ग्रेड” होम स्टे की परिभाषा में तत्काल संशोधन करे और नियमों को सख्त बनाया जाए, ताकि केवल वही लोग होम स्टे की सुविधा दे सकें जो वास्तव में अपने निवास स्थान में सीमित कमरों के साथ पर्यटकों को ठहराते हैं। इस पूरे मामले को लेकर पर्यटन सचिव देवेश कुमार ने सख्ती दिखाते हुए सभी जिलों के पर्यटन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध रूप से होम स्टे की आड़ में चल रहे होटलों की तुरंत जांच की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि असली होम स्टे और व्यावसायिक होटलों में स्पष्ट अंतर होना चाहिए और सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

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