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मनाली में 11 साल बाद फिर सजी देव संसद: 300 से ज़्यादा देवी-देवताओं का बुलावा, कंगना रनौत ने भी लिया आशीर्वाद

मनाली/31/10/2025

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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित ऐतिहासिक नग्गर कैसल एक बार फिर भव्य धार्मिक आयोजन का साक्षी बन रहा है। यहाँ 11 साल बाद जगती — देव संसद का शुभारंभ हुआ है। इस आयोजन की विशेष बात यह है कि इसमें कुल्लू, मंडी और लाहौल–स्पीति के 300 से अधिक देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। पहाड़ी संस्कृति में यह देव संसद ऐसी सभा है, जहाँ देवता प्राकृतिक आपदाओं और समाज से जुड़े मुद्दों पर निर्णय देते हैं।

देव संसद में भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी पहुंचे और उन्होंने बताया कि देव भूमि की सुरक्षा और आपदा निवारण जैसे मुद्दों पर देव आदेश जारी किए जाएंगे। दूर-दराज़ के गांवों से देवताओं के निशान, कारदार और बजंतिए नग्गर पहुंच रहे हैं।

देव संसद क्यों होती है?

नग्गर का जगती पट्ट धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। मान्यता है कि जब घाटी में कोई बड़ा संकट आने की संभावना होती है, तो सभी देवी-देवता यहाँ एकत्रित होकर लोगों के लिए समाधान और दिशानिर्देश देते हैं। इससे पहले वर्ष 2006 की देव संसद में देवताओं ने हिमालयन स्की विलेज प्रोजेक्ट को रोकने का आदेश दिया था और इसके बाद वह प्रोजेक्ट ठप पड़ गया था।

कंगना रनौत ने की शिरकत

मंडी से सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत भी नग्गर कैसल पहुंचीं और देवी-देवताओं के दर्शन किए। कंगना ने कहा कि राज्य हाल ही में आपदा से प्रभावित हुआ है और देव संसद में क्षेत्र की शांति और कल्याण के लिए प्रार्थना की जा रही है। उन्होंने कहा— “यह आयोजन विश्व कल्याण और प्रदेश की भलाई के लिए हो रहा है। मैं भी यहां आकर आशीर्वाद लेने पहुंची हूं।”

आयोजन स्थल पर इन दिनों पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनें, देव रथों का आगमन और श्रद्धालुओं की भीड़ वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा भर रही है। देव भूमि में ऐसे आयोजन न सिर्फ आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को भी मजबूत करते हैं।

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