देव संसद का बड़ा फैसला: बिजली महादेव रोपवे प्रोजेक्ट खारिज, धार्मिक स्थल को पर्यटन केंद्र बनाने का किया विरोध
नग्गर/31/10/2025
11 साल बाद फिर से सजी देव संसद (जगती) में एक बड़ा निर्णय लिया गया है। देव संसद ने बिजली महादेव रोपवे प्रोजेक्ट को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा है कि धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल न बनाया जाए और परंपराओं से खिलवाड़ न हो। बताया जा रहा है कि बैठक में मौजूद देवी-देवताओं के प्रतिनिधियों ने एक सुर में इस प्रोजेक्ट का विरोध किया।
रघुनाथ जी के कारदार दानवेंद्र सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि देव संसद ने संदेश दिया है—
“बिजली महादेव को नाराज़ मत करो।”
कारदार ने कहा कि धार्मिक स्थान आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र हैं, इन्हें व्यवसायिक या पर्यटन हब में बदलने की कोशिश गलत दिशा है। उनका कहना है कि देव भूमि हिमाचल में देव संस्कृति सर्वोपरि है और यदि इसमें हस्तक्षेप किया गया तो इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे।
देव संसद में केवल बिजली महादेव पर ही नहीं, बल्कि ढालपुर क्षेत्र में होने वाले कुष्टु काहिका मामले पर भी चर्चा हुई और देवताओं ने इस संबंध में भी आदेश जारी किए।
इस फैसले के बाद देव ढांचे और स्थानीय परंपराओं को देखते हुए सरकार और प्रशासन पर यह दबाव बढ़ गया है कि धार्मिक स्थलों पर बड़े निर्माण और व्यावसायिक योजनाओं को लेकर सावधानी बरती जाए।