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आजादी के 78 साल बाद भी सड़क से वंचित गांव – मरीजों को पालकी में ले जाने की मजबूरी, बीच रास्ते में टूटती हैं सांसे

चंबा/06/11/2025

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चंबा जिले की उपतहसील तेलका के तहत आने वाली भजोत्रा पंचायत के कई गांव आज भी सड़क सुविधा का सपना ही देख रहे हैं। स्वतंत्रता के 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद द्रोड़, शाला, रणहोटी, मटवाड़, जलेली, भोता, चटेला, भिड़ और पोठा जैसे गांव अब तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाए हैं। इस कारण यहां के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी मीलों तक पैदल चलना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों तक सामान पहुंचाना अब भी बेहद कठिन है। कई परिवार खाने–पीने से लेकर अन्य जरूरी सामान तक खच्चरों और पीठ पर लादकर अपने घर पहुंचाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, इस कठिन जीवन का सबसे दर्दनाक पहलू है बीमार मरीजों को सड़क तक पहुंचाना। सड़क न होने की वजह से मरीजों को पालकी में डालकर घंटों पैदल चलना पड़ता है। कई बार हालत इतनी गंभीर होती है कि मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। हाल ही में एक वृद्ध व्यक्ति की जान इसलिए नहीं बच पाई क्योंकि पालकी में सड़क तक ले जाते समय उनकी सांसे थम गईं। परिवार को मजबूरन उन्हें वापस गांव ले जाना पड़ा।

ग्राम पंचायत भजोत्रा के उपप्रधान कमलेश कपूर, वार्ड सदस्य घबर सिंह सहित ग्रामीणों दर्शन कुमार, संदीप कुमार, संजय कुमार, कालू राम, रमेश कुमार, तिलक राज, सुरेश कुमार आदि का कहना है कि उन्होंने कई बार सड़क सुविधा की मांग उठाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता रजत सहगल ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर वतरवाह से द्रोड़ गांव तक सड़क निर्माण के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू किया गया था, जो अब पूरा होने की प्रक्रिया में है। सर्वेक्षण पूरा होते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द फैसला लेगा और दशकों से लंबित सड़क सुविधा का सपना पूरा होगा।

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