हमीरपुर में महिला की हत्या पर जनआक्रोश: हाईवे पर चार घंटे तक प्रदर्शन, CM सुक्खू ने दिया न्याय का भरोसा
हमीरपुर/10/11/2025
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में 40 वर्षीय महिला की मौत के बाद रविवार को स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों और परिजनों ने महिला का शव सड़क पर रखकर हमीरपुर–धर्मशाला नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शन सुबह करीब साढ़े नौ बजे शुरू हुआ और लगभग चार घंटे तक जारी रहा। इस दौरान दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह से ठप हो गया। ग्रामीणों का कहना था कि महिला के साथ हुए अपराध को लेकर न तो प्रशासन ने समय पर संज्ञान लिया और न ही परिवार को उचित सहायता उपलब्ध करवाई गई, जिसके चलते उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध करना पड़ा।
घटना 4 नवंबर की है जब महिला खेत में घास काट रही थी। इसी दौरान एक लड़के ने उसके साथ जबरन दुराचार करने की कोशिश की। विरोध करने पर आरोपी ने उस पर दराती से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। हालत बिगड़ने पर महिला को पीजीआई चंडीगढ़ रेफ़र किया गया, जहाँ पाँच दिन तक उपचार चलने के बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर बेहतर इलाज नहीं मिला और प्रशासन ने भी किसी तरह की सहायता नहीं की। मृतका के देवर ने बताया कि आईसीयू बेड की उपलब्धता के लिए भी उन्हें लगातार प्रयास करने पड़े। साथ ही, परिवार का यह भी कहना है कि आरोपी की उम्र गलत बताई जा रही है — वे दावा करते हैं कि आरोपी नाबालिग नहीं बल्कि बालिग है।
हाईवे जाम की सूचना मिलते ही डीसी अमरजीत सिंह, एसपी भगत सिंह, विधायक आशीष शर्मा और कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा मौके पर पहुंचे। पुलिस और प्रशासन लगातार ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन परिजन तब तक नहीं माने जब तक मुख्यमंत्री से बात नहीं करवाई गई। अंततः जब **मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू** ने परिजनों से फोन पर बात की, तब जाकर लोगों ने प्रदर्शन समाप्त किया। मुख्यमंत्री ने परिजनों को आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और परिवार को न्याय दिलाने में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। उन्होंने पुलिस को जिले में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश भी दिए।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि आरोपी को घटना की रात ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उसकी वास्तविक उम्र की दोबारा जांच करवाई जाएगी। मृतका का बेटा दिव्यांग है, इसलिए सरकार ने परिवार को हर संभव आर्थिक और सामाजिक सहायता प्रदान करने की बात कही है। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद जाम हटाया गया और यातायात बहाल हो सका। यह घटना न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और ग्रामीण इलाकों में संवेदनशील मामलों के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न छोड़ जाती है।