सोलन: बघाट बैंक का बड़ा खुलासा — 32 लाख के ऋण पर 76 लाख का ब्याज, गार्ड की 10 साल की सैलरी भी जोड़ दी
सोलन । बघाट बैंक के ऋण मामलों की जब एआरसीएस (सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं) की विशेष अदालत में समीक्षा हुई तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। सबसे हैरान करने वाला मामला कंडाघाट क्षेत्र से जुड़ा है, जहां 32 लाख के ऋण पर बैंक ने 76 लाख रुपए ब्याज जोड़ दिया। कुल ऋण 1.08 करोड़ हो चुका है, जबकि ऋणधारक बार-बार पूछने के बावजूद यह नहीं जान सका कि इतनी भारी ब्याज राशि किस आधार पर लगाई गई।
10 साल तक गार्ड की सैलरी भी जोड़ी
बैंक के प्रतिनिधि ने अदालत में बताया कि ऋणधारक के मशरूम प्लांट को कब्जे में लेने के बाद 10 वर्षों तक वहां सुरक्षा गार्ड तैनात किया गया था और उसकी सैलरी को भी ब्याज और खर्चे में जोड़ दिया। इस पर एआरसीएस भी चकित रह गए और कहा कि इतने वर्षों तक खर्च जोड़ने के बजाय बैंक प्लांट की कुर्की कर रिकवरी कर लेता तो एनपीए बढ़ने से बच जाता। उन्होंने मामले की जांच का आश्वासन दिया और ऋणधारक को अपील करने की सलाह दी।
8 बीघा भूमि पर 4.85 करोड़ का ऋण, अब एनपीए
दूसरे मामले में सोलन के अश्वनी खड्ड क्षेत्र की 8 बीघा भूमि पर बैंक ने 4.85 करोड़ का ऋण मंजूर कर दिया, जो अब एनपीए हो चुका है। एआरसीएस ने निर्देश दिए कि या तो ऋणधारक ओटीएस योजना में भुगतान करें, अन्यथा उनकी व गारंटर की संपत्ति अटैच होगी।
18 लाख का ऋण — एआरसीएस ने कहा ‘न चुकाया तो जेल तैयार रहे’
एक अन्य केस में 18 लाख का ऋण लेने वाला व्यक्ति भुगतान नहीं कर रहा था। गिरवी जमीन बहुत कम होने के कारण उससे रिकवरी संभव नहीं। जब उसने कहा कि गारंटर की मृत्यु हो चुकी है और उसके पास भी कुछ नहीं है, तो एआरसीएस ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा — “फिर जेल जाने को तैयार रहिए।” साथ ही उसके ट्रक जब्त करने के आदेश जारी हुए।
10 लाख का चेक भी बाउंस
इसी बीच एक डिफाल्टर द्वारा बैंक को दिया गया 10 लाख का चेक बाउंस हो गया, जिससे बैंक की मुश्किलें और बढ़ गईं।
4 संपत्तियां अटैच, 3 गाड़ियां जब्त करने के आदेश
अदालत ने 4 डिफाल्टरों व उनके गारंटरों की संपत्तियां अटैच करने और 3 गाड़ियों को जब्त करने के निर्देश दिए।
कुछ राहत भी — 25.90 लाख जमा
सुनवाई के दौरान एक ऋणधारक ने 25.90 लाख रुपए का चेक जमा किया। दो अन्य मामलों में 50,000 और 20,000 रुपए नकद जमा हुए।
34 मामलों में रिकवरी, एक महीने का समय दिया
एआरसीएस गिरीश नड्डा ने बताया कि कुल 49 मामलों में से 34 ऋण रिकवरी से जुड़े थे। अधिकांश ने ओटीएस में समय मांगा है, जिन्हें एक माह की मोहलत दे दी गई।
बघाट बैंक के ऋण मामलों में सामने आए इन खुलासों ने न केवल ऋण प्रक्रिया की खामियों को उजागर किया है बल्कि रिकवरी व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।